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'हनुमान अंश' फिल्म 'टॉक्सिक' के जमाने में इंसान की आत्मा को डीटॉक्स करने वाली है : ज्योति वाघमारे

हनुमान अंश

मुंबई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म 'हनुमान अंश' की आंधी जारी है और कई राज्यों में इसे टैक्स फ्री करने की मांग तेज हो गई है। महाराष्ट्र में भी फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग होने लगी है। इसी बीच शिवसेना सांसद ज्योति वाघमारे ने 'हनुमान अंश' फिल्म की तारीफ की। उन्होंने कहा यह टॉक्सिक के जमाने में इंसान की आत्मा को डीटॉक्स करने वाली फिल्म है।

मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में शिवसेना सांसद ने कहा कि मैंने भी वो फिल्म देखी। यह इतनी सुकून देने वाली, आध्यात्मिकता पर और जिंदगी के सही मतलब की खोज कराने वाली फिल्म है। हमारे नेता एकनाथ शिंदे प्रखर हिंदुत्ववादी हैं, तो मैं भी ये चाहूंगी कि ये फिल्म टैक्स फ्री हो और इसके लिए हम पूरा प्रयास करेंगे और विशेषकर मैं देश की जेनजी से निवेदन करना चाहूंगी कि आप फिल्म जाकर जरूर देखें।

उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आता है कि कांग्रेस को हिंदुत्व से डर क्यों लगता है। कांग्रेस क्यों भागती है, ये तो एक फिल्म है। कलाकारों ने अपनी अतुलनीय कला का परिचय इसमें दिया है और अगर भारत की जड़ें आध्यात्मिकता से जुड़ी हैं। नीम करौली बाबा जिन्हें सिर्फ भारत के लोग ही नहीं मानते। उन्हें तो विदेशों के लोग भी मानते हैं। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स आकर वहां सिर झुकाते हैं। फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग का नाम भी शामिल है, जिन्हें पूरी दुनिया मानती है, उनका भी अगर राहुल गांधी विरोध कर रहे हैं, तो उन्हें एक बार अपने दिमाग की जांच करानी चाहिए।

शिवसेना की सांसद ज्योति वाघमारे ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर कहा कि नाराज फूफा जी को कितना भी दिया जाए तो भी उनकी नाराजगी खत्म नहीं होती। आप कितना भी अच्छा करो, लेकिन अगर कोई इंसान आपको पसंद नहीं करता है तो वे आपके नमक को भी बेस्वाद ही कहेगा। इसी तरीके का ये लोग बर्ताव कर रहे हैं, तो अगर उनकी आंखों में मोतियाबिंद हुआ है तो हम उस मोतियाबिंद का ऑपरेशन शिवसेना वैद्य के सहायता कक्ष से फ्री में करा देंगे। मुझे लगता है कि इसके बाद उन्हें पीएम मोदी द्वारा किए गए काम दिखने लग जाएं।

जम्मू-कश्मीर मे वंदे मातरम के पूरे छंद गाए जाने पर कांग्रेस द्वारा विरोध करने पर शिवसेना सांसद ने कहा कि कांग्रेस के राज में जम्मू-कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा भी लहराया नहीं जाता था। आज पीएम मोदी के राज में जम्मू-कश्मीर में पूरा वंदे मातरम गाया जा रहा है। ये निशानी है मोदी सरकार की यशस्विता की। लेकिन मुझे यहां पर पूछना है कांग्रेस से कि आपको वंदे मातरम से परहेज क्यों है? वंदे मातरम सिर्फ एक गाना नहीं है बल्कि ये भारत के स्वतंत्रता संग्राम की निशानी है। यही कांग्रेस थी जिसने पहली बार वंदे मातरम को तोड़ा, छह स्टैंजा को दो स्टैंजा कर दिए, और इसी कांग्रेस के काल में देश का विभाजन हुआ। मैं पूछना चाहती हूं कि कांग्रेस विभाजनवादी मानसिकता कब बंद करेगी?

उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस से यह भी पूछना चाहती हूं कि अगर नेशनल कॉन्फ्रेंस को कोई परहेज नहीं है, उन्हें कोई ऑब्जेक्शन नहीं है, अगर वो वंदे मातरम के सारे स्टैंजा गाना चाहते हैं और अगर भारत का संविधान हमें राइट टू एक्सप्रेशन देता है, हमें पूरा अधिकार देता है, तो कांग्रेस कौन है हमारे अधिकारों का हनन करने वाली? कांग्रेस क्यों घबराती है? कांग्रेस को ये डर है कि वंदे मातरम के आगे के स्टैंजा में हम भारत माता को मां के रूप में देखते हैं, दुर्गा के रूप में देखते हैं, काली के रूप में देखते हैं, तो फिर कांग्रेस ये जाहिर कर दे कि हम हिंदू विरोधी हैं, हम हिंदू देवी-देवताओं के विरोधी हैं, हम दुर्गा मां के विरोधी हैं, और वो हिंदुओं से वोट न मांगें।

शिवसेना सांसद ने कहा कि यह जो इंडिया अलायंस है, वहां पर लोग विचारधारा के आधार पर नहीं आए थे। कांग्रेस में अभी हम देख रहे हैं कि अपने सहयोगी पार्टियों पर ऐसी जोर-जबरदस्ती है और जोर-जबरदस्ती किसके लिए कर रहे हैं। हम ये समझ सकते हैं कि कोई इलेक्शन है, उसमें दो सीटें आप ले रहे हैं, चार सीटें हम ले रहे हैं तो उस पर कुछ खींचातान हो सकता है, लेकिन राष्ट्रगीत के मामले पर, वंदे मातरम के मुद्दे पर, देशभक्ति के मुद्दे पर विरोध करने वाली कांग्रेस के साथ एक भी पार्टी नहीं रहेगी, सिर्फ सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे उनके साथ रह जाएंगे।

महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर पर शिवसेना सांसद ने कहा कि ऑपरेशन होगा या नहीं होगा, होगा तो कब होगा? इसका डिसीजन तो हमारे सर्जन लेंगे। हम जैसे कंपाउंडर उस पर बोलें तो ये बात ठीक नहीं है। लेकिन हमारे सर्जन और डीन की योग्यता को पूरा महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश देख चुका है। उद्धव ठाकरे जो कल तक घर से बाहर नहीं निकलते थे, आज वो दर-दर घूम रहे हैं। जो कभी मंत्रियों और विधायकों को नहीं मिलते थे, आज वो हर किसी को मिल रहे हैं। तो कम से कम एकनाथ शिंदे के डर की वजह से वो लोगों से मिल तो रहे हैं, काम तो कर रहे हैं, तो ये डर हमें अच्छा लगा, ये डर होना जरूरी है।

शिवसेना सांसद ने कहा कि मैं उनको यही कहना चाहूंगी कि जंगल में अगर कोई जानवर दो कदम पीछे चला जाए, तो समझ लेना शेर आ रहा है, लेकिन खुद शेर दो कदम पीछे चला जाए, तो समझ लेना कि एकनाथ शिंदे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि टाइगर का ऑपरेशन नहीं हो सकता, लेकिन टाइगर कौन है और टाइगर की खाल पहने हुए लोमड़ी कौन है, ये महाराष्ट्र समझ चुका है। धनुष-बाण चिन्ह हमारी शिवसेना की आन-बान-शान है और उस पर वो प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। ये टाइगर नहीं शेर की खाल पहनी हुई लोमड़ियां हैं। हमारे नेता एकनाथ शिंदे असली शेर हैं, ये विधानसभा के चुनाव में साबित हुआ, ये नगरपालिका के चुनाव में साबित हुआ, और पूरे महाराष्ट्र ने ये माना है।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं मानती हूं कि नवरात्रि, दुर्गा पूजा मातृ शक्ति का उत्सव है। महिलाओं का सम्मान होना चाहिए। किसी भी समारोह में जाति को दूर रखकर कोई जुड़ रहा है तो स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन, हमारी संस्कृति का सम्मान बरकरार रहना चाहिए।

--आईएएनएस

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