फरीदाबाद, 8 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से दो दिवसीय कार्यक्रम ‘शी इज चेंजमेकर’ का समापन मंगलवार को हुआ। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन नारी शक्ति और राष्ट्र निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प का जीवंत संगम है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि मेरा मानना है कि हमारे देश में महिलाओं के लिए बहुत अच्छी नीतियां और कानून हैं। इन कानूनों को लागू करने के लिए हमारे पास सिस्टम भी मौजूद हैं। हालांकि, मेरा यह भी मानना है कि महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को हल करने में समाज की अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि देशभर की महिला विधायकों के लिए हरियाणा में दो दिन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम बहुत सफल रहा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला उद्घाटन समारोह में शामिल हुए, जबकि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समापन समारोह में मौजूद रहे। दो दिन के इस कार्यक्रम के दौरान, हमने महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों और विकास को महिला-केंद्रित कैसे बनाया जाए, इस पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि जब विकास महिला-केंद्रित होता है, तो अंततः इससे पूरे परिवार को भी लाभ होता है। हमारी सोच में महिला है, हमारी परंपरा में महिला है, हमारी संस्कृति में महिला है और हमारी सामाजिक चेतना में भी महिला है। हमारे लिए महिला सिर्फ परिवार का केंद्र नहीं है, वह समाज की शक्ति है। वह कोमलता की मूरत और साहस व संकल्प की प्रतीक भी है।
सोमवार को वर्कशॉप के उद्घाटन के दिन, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को एक ऐतिहासिक जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिला नेताओं की एक नई पीढ़ी सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब सार्वजनिक सेवाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा होगी। महिलाओं को अपनी चिंताओं और उम्मीदों को पूरा करने के लिए जरूरी कानून तय करने में खुद हिस्सा लेना चाहिए। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए विभिन्न विधायी कदमों का जिक्र करते हुए इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसे संस्थानों की उभरती चुनौतियों की पहचान करने और उनके समाधान में मदद करने में अहम भूमिका है।
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