बेंगलुरु, 18 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) रवि के ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में तेजस एलसीए मार्क-1ए, एचटीटी-40, एएलएच ध्रुव के सिविल संस्करण, जीई इंजन की आपूर्ति, सुपर-सुखोई आधुनिकीकरण कार्यक्रम और भारत के हेलीकॉप्टर निर्माण इकोसिस्टम सहित कई अहम रक्षा परियोजनाओं पर विस्तार से बात की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल: आज आप तेजस के पहले कॉन्ट्रैक्ट को पूरा कर रहे हैं और क्या-क्या खास होने वाला है?
जवाब: हम एलसीए के एफओसी कॉन्ट्रैक्ट को पूरा कर रहे हैं, जिससे मैं काफी करीब से जुड़ा रहा हूं, जब मैं डिवीजन को हेड कर रहा था। तो ये मेरे लिए बहुत गर्व का क्षण है कि हम उस कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने में सक्षम हुए हैं और अब अगले कदम यानी मार्क 1ए की डिलीवरी की ओर बढ़ रहे हैं। और उसके अलावा, हम एक बेसिक ट्रेनर, एचटीटी-40 सप्लाई कर रहे हैं, जिसकी एयरफोर्स को बहुत जरूरत है। हम सब इस बारे में जानते हैं, और उसकी भी डिलीवरी हम आज से शुरू कर रहे हैं। और सबसे महत्वपूर्ण, एएलएच ध्रुव का सिविल वर्जन, ये एचएएल के लिए एक बहुत बड़ा माइलस्टोन है। हमने सर्टिफाइंग एजेंसी के साथ बहुत क्लोजली काम किया है ताकि हम इस स्टेज पर आ सकें जहां हम सिविल मार्केट में एंटर कर रहे हैं और हमने प्राइवेट पार्टनर्स के साथ मिलकर मिलिट्री और सिविल दोनों तरह के पार्ट्स बनाने के लिए एक इकोसिस्टम डेवलप किया है। तो जो डुअल-यूज हम कहते हैं, वो अब हकीकत में आ गया है। और हमें गर्व है कि हम ऐसा कर पाए हैं, और हम जल्द ही बड़े पैमाने पर सिविल मार्केट में आने वाले हैं।
सवाल: मार्क 1ए, चूंकि अभी पिछले जुलाई में एक रिव्यू मीटिंग हुई थी, जिसमें कहा गया था कि सितंबर में भी एक मीटिंग होगी, रिव्यू किया जाएगा। सर, क्या ये मीटिंग हुई है, क्या स्टेटस है, और कब तक पहला बैच मार्क 1ए का मिलना शुरू हो जाएगा?
जवाब: अभी देखिए, उसमें इंटीग्रेशन का काम थोड़ा बाकी है। जैसे, रडार का है या वेपन इंटीग्रेशन का, अभी इंटीग्रेशन खत्म नहीं हुआ है। ये इंटीग्रेशन एक इटरेटिव प्रोसेस है, वो एक फ्लाइट में खत्म नहीं होता है। उसको 10-12 सॉर्टीज करनी पड़ती हैं, सॉफ्टवेयर चेंज करना पड़ता है, फिर से फ्लाई करना पड़ता है। वो अभी, अभी खत्म नहीं हुआ है। वो स्पेसिफिकेशन को मीट नहीं कर रहा है, जो एयरफोर्स को डिलीवर करने की कंडीशन में हो। इसलिए हम उसको खत्म करके, हमने लास्ट टाइम बोला था कि सितंबर में हम आएंगे। अभी सितंबर में दिन बाकी हैं। हमें पूरा भरोसा है कि हम इसे पूरा करके कस्टमर के पास वापस जा पाएंगे। जैसा मैंने कहा, हमारे पास अभी 10 इंजन हैं, और सभी एयरक्राफ्ट में वो इंजन लगे हुए हैं। तो एक बार सर्टिफिकेशन हो जाने के बाद, उम्मीदों के मुताबिक, हम एयरक्राफ्ट डिलीवर करने में सक्षम होंगे।
सवाल: 180 मार्क 1ए है। कोई रिवाइज्ड एस्टिमेट है, टाइम एस्टिमेट है कि कब तक ये डीलिवर होगा?
जवाब: देखिए, अभी मेरे पास इंजन नहीं थी, लेकिन अब धीरे-धीरे आना शुरू हो गया है। लेकिन हमने कभी भी एयरक्राफ्ट बनाना बंद नहीं किया है। हमारा जो एयरफ्रेम है, लोग सोचते हैं कि ये सिर्फ एक एयरफ्रेम है। ऐसा नहीं है। ये इंजन को छोड़कर एक पूरा एयरफ्रेम है। और इसे पहले ही टेस्ट किया जा चुका है। और हम वो इंजन लेकर दूसरे में लगा देंगे, और हम ऐसा करते हैं। तो, मेरे पास अभी 26-27 एयरफ्रेम्स ऑलरेडी तैयार हैं। और हम तीन डिवीजन्स में एलसीए बना रहे हैं। और चौथा हमने प्राइवेट वेंडर्स को दे दिया है। वो हमको एयरफ्रेम्स डिलीवर कर रहे हैं। तो हम कॉन्फिडेंट हैं कि जब भी इंजन उपलब्ध होंगे, हम डिलीवरी पूरी करने में सक्षम होंगे। हमारे पास जो भी उपलब्ध होगा, हम तुरंत उसे कर पाएंगे।
सवाल: आपने इंजन की बात की, इंजन की डिलीवरी जो है, वो चूँकि इतना बड़ा प्रोजेक्ट है, इतना बड़ा कॉन्ट्रैक्ट है, 180 मार्क 1ए का, अभी पिछली बार कहा गया था कि हर साल 12 इंजन या इस तरीके से इंजन आना शुरू होंगे। क्या वहां से जो सप्लाई है, वो स्ट्रीमलाइन होगी?
जवाब: हमने क्या किया है? पिछली बार हम सिर्फ जीई या किसी अन्य इंजन सप्लायर से सिर्फ पूछ रहे थे कि कब दोगे, ये तुम्हारा डिलीवरी शेड्यूल है, वैसे। अभी हमने ऐसा नहीं किया है। हमने किया है, हम जीई वेंडर के टायर-वन, टायर-टू तक गए हैं ताकि पता चल सके कि उनकी असली प्रॉब्लम क्या है, वो क्यों नहीं कर पा रहा है। और उनका थोड़ा कास्टिंग का इश्यू था। हमने बोला, हमारी भी फाउंड्री फोर्ज है, हम भी आपको जरूरत पड़ने पर हेल्प करेंगे। तो, अभी तक, मुझे लगता है कि वे अपनी कुछ समस्याओं से बाहर आने में सक्षम हैं, जो उम्मीद है कि वे इस साल तक सभी समस्याओं को खत्म कर देंगे। और फिर अगले साल से, वे बड़ी संख्या में सप्लाई करना शुरू कर देंगे।
सवाल: हेलीकॉप्टर्स की बात करते हैं। इस वक्त इंडिया हर तरीके के हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चर कर रहा है। और अब तो आईएमआरएच भी है, एलयूएच भी आ चुका है, एएलएच हम लोग दे ही रहे हैं। मार्केट शेयर की बात करें तो कितना टाइम लगेगा कि ऑल ओवर वर्ल्ड में।
जवाब: सिविल मार्केट में हम अभी एंटर कर रहे हैं, इसमें थोड़ा टाइम लगेगा। ध्रुव, मिलिट्री में सक्सेसफुल है और सब ठीक चल रहा है। हम और भी बनाएंगे। आपने हाल ही में देखा है, एमओडी ने हमारे लिए कुछ और एएलएच क्लियर किए हैं। मतलब ये सरकार का ध्रुव प्लेटफॉर्म पर जो कॉन्फिडेंस है, वो दिखाता है। तो हमें भरोसा है कि हम जल्द ही इसे एक्सपोर्ट करना भी शुरू कर देंगे। क्योंकि अगर लोकल सर्विसेज प्रोडक्ट से खुश हैं, तो इसे बाहर मार्केट करना आसान है। और हम सिविल में एंटर कर रहे हैं। सिविल में, आपको भी पता है, बहुत-बहुत बड़ा मार्केट है। पहले हम लोकल इंडिया को सर्व करना चाहते हैं। इंडिया का पूरा, जैसे मेडिकल इवैक्यूएशन हो, या चार्टर हो, या मूवमेंट्स हो, इन सबका हम करके, फिर हम देश के बाहर मार्केटिंग शुरू करेंगे।
सवाल: सुखोई के मॉडर्नाइजेशन की बात चल रही है। सुपर-सुखोई, ये एक ऐसा टर्मिनोलॉजी है, जिसको कि हर कोई चाहता है कि जल्द से जल्द सुखोई का सुपर-सुखोई हो जाए। किस तरीके से ये प्रोग्राम अभी आगे चल रहा है, और क्या अभी फिलहाल किस स्टेज पे है?
जवाब: उसमें अभी हम सभी सिस्टम्स, जो-जो रडार चेंज कर रहे हैं, डीआरडीओ का रडार है, उसको चेंज कर रहे हैं। और हम भी लगभग 40 सिस्टम्स को चेंज कर रहे हैं, 40 प्लस सिस्टम्स को चेंज कर रहे हैं, प्राइवेट पार्टनर्स, डीआरडीओ के साथ। हम भी थोड़ा कर रहे हैं। तो अभी उसका ऑर्डर, मुझे लगता है कि ये फाइनल स्टेज में है, हमें मिल जाना चाहिए। हमें पूरा भरोसा है कि जब अप्रूवल आएगा तो उसमें जो टाइमलाइन है, हम उसे पाने करने में सक्षम होंगे।
--आईएएनएस
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