सूरत, 2 सितंबर (आईएएनएस)। 26.12 लाख रुपए के कथित साइबर फ्रॉड के मामले में सिलवासा से एक 20 साल के छात्र को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में सूरत के एक निवासी को पहले सोशल मीडिया रील्स देखने और उन्हें लाइक करने के लिए छोटे-छोटे पेमेंट का लालच दिया गया, और फिर बाद में उसे बड़े 'इन्वेस्टमेंट' पेमेंट करने के लिए मनाया गया।
आरोपी की पहचान आदित्य पांडे के तौर पर हुई है, जो दादरा और नगर हवेली का रहने वाला है और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का है। उसे सूरत शहर पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने तकनीकी जांच के बाद गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता से शुरू में टेलीग्राम के जरिए संपर्क किया गया और 'शेयरचैट' रील्स देखने जैसे काम करने का ऑफर दिया गया।
पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए, धोखाधड़ी करने वालों ने शुरुआती काम के बाद शिकायतकर्ता के बैंक खाते में 150 रुपए जमा किए। इसके बाद शिकायतकर्ता को बताया गया कि पेमेंट और इन्वेस्टमेंट वाले कामों से ज्यादा कमाई की जा सकती है।
आरोपी ने कथित तौर पर टेलीग्राम के जरिए नकली और फर्जी वेबसाइटों के लिंक भेजे, जहां शिकायतकर्ता से अकाउंट बनाने और कथित इन्वेस्टमेंट के कामों के तहत अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आखिरकार 26,12,791 रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब शिकायतकर्ता ने बाद में पैसे निकालने की कोशिश की, तो निकासी प्रोसेस नहीं हो पाई, जिससे उन्हें एहसास हुआ कि ये ट्रांजैक्शन धोखाधड़ी वाले थे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने बताया कि पांडे के एचडीएफसी बैंक खाते में 8 जनवरी, 2026 को शिकायतकर्ता से 1.20 लाख रुपए आए थे।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि पांडे ने टेलीग्राम के जरिए अपना खाता एक फरार आरोपी (जिसकी पहचान पुलिस ने आरिफ के तौर पर की है) को दिया था, ताकि साइबर धोखाधड़ी से मिले पैसे का गैर-कानूनी लेन-देन किया जा सके और इसके बदले में उसे तीन प्रतिशत कमीशन मिले।
पांडे के सेविंग्स अकाउंट की जांच से पता चला कि 4 दिसंबर, 2024 और 12 मई, 2026 के बीच कुल 51,31,272 रुपए का लेन-देन हुआ था। पुलिस ने इनमें से 1,63,020 रुपए के लेन-देन को संदिग्ध माना।
नेशनल साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के जरिए खाते की जांच करने पर अलग-अलग राज्यों में चार शिकायतें भी दर्ज मिलीं, जिनमें कथित धोखाधड़ी की रकम 1,97,18,059 रुपए थी। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (साइबर सेल) विशाखा जैन ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि पांडे ने अपने बैंक अकाउंट का इस्तेमाल एक फरार आरोपी को करने दिया था, क्योंकि उसे इसके जरिए होने वाले ट्रांज़ैक्शन पर कमीशन का लालच दिया गया था।
जैन ने कहा, "तकनीकी जांच के जरिए एचडीएफसी बैंक अकाउंट होल्डर आदित्य पांडे की पहचान की गई और उसे गिरफ़्तार कर लिया गया।"
जैन ने बताया कि फरार आरोपी को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने कहा, "गिरफ्तार आरोपी का अब तक पुलिस को कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है, हालांकि जांच के दौरान एनसीआरपी में चार शिकायतें मिली हैं और संबंधित स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी दी जाएगी।"
धोखाधड़ी के बड़े तौर-तरीकों के बारे में बताते हुए जैन ने कहा कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की वजह से धोखेबाज लोगों से आमने-सामने मिले बिना ही संपर्क कर पाते हैं।
उन्होंने कहा, "अपराधी ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल संभावित पीड़ितों तक पहुंचने और ऐसे लोगों को खोजने के लिए करते हैं जिनके बैंक अकाउंट या अन्य संसाधनों का इस्तेमाल धोखाधड़ी करने में किया जा सके।"
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर ऑनलाइन शेयर-मार्केट निवेश और अन्य आकर्षक ऑफर के जरिए ज्यादा मुनाफे का वादा करने वाले विज्ञापनों से सावधान रहें।
नागरिकों को यह सलाह भी दी गई है कि वे कोई भी वित्तीय लेन-देन करने से पहले अनजान लोगों की पहचान की पुष्टि कर लें।
--आईएएनएस
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