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गुजरात पुलिस की कार्रवाई: चीनी साइबर गिरोह से जुड़े आरोपी गिरफ्तार, 33 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी का खुलासा

गुजरात

सूरत, 24 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस की सूरत साइबर क्राइम सेल ने चीनी साइबर ठगी नेटवर्क से कथित रूप से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी बैंक खातों की व्यवस्था करके साइबर ठगी से प्राप्त रकम को नेटवर्क तक पहुंचाने में मदद करता था। जांच में उससे जुड़े 34 बैंक खातों के माध्यम से 33.14 करोड़ रुपए से अधिक की कथित ठगी का खुलासा हुआ है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा (39) के रूप में हुई है, जो पेशे से मैनपावर सप्लायर बताया गया है। वह चेन्नई का निवासी है और पहले गुरुग्राम में भी रह चुका है। पुलिस ने उसे निवेश के नाम पर की गई साइबर धोखाधड़ी के एक मामले की जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, मुख्य मामला 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच हुई कथित निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता को शेयर बाजार में डॉलर निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा दिया गया था और उसे एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा गया।

आरोप है कि शिकायतकर्ता ने वेबसाइट और कस्टमर सर्विस चैनलों के जरिए उपलब्ध कराए गए विभिन्न बैंक खातों में 1.52 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कर दी। बाद में उसे अपनी रकम निकालने की अनुमति नहीं दी गई।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस का दावा है कि आरोपी पहले गिरफ्तार किए जा चुके लोगों से बैंक खाते हासिल करता था और प्रत्येक लेनदेन पर 3 प्रतिशत कमीशन देता था। इसके बाद वह इन्हीं खातों को 3.5 प्रतिशत कमीशन पर दुबई स्थित एक फरार आरोपी को उपलब्ध कराता था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, दुबई में मौजूद यह आरोपी एक चीनी साइबर गिरोह के साथ मिलकर काम कर रहा था और साइबर ठगी की रकम को यूएसडीटी के जरिए इधर-उधर स्थानांतरित करता था।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जांच के दौरान आरोपी से जुड़े 34 बैंक खातों की पड़ताल की गई। इसमें 14 राज्यों से कुल 113 शिकायतें सामने आईं, जिनमें 33.14 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी का आरोप है।

सबसे ज्यादा 34 शिकायतें कर्नाटक से दर्ज हुईं। इसके अलावा महाराष्ट्र से 11, गुजरात और तमिलनाडु से 10-10 शिकायतें मिलीं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, बिहार और असम से 6-6 मामले दर्ज पाए गए। दिल्ली से भी 6 शिकायतें सामने आईं।

जांच में एक अलग डेटा एंट्री जॉब घोटाले का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने मुंबई, इंदौर, पटना, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में कॉल सेंटर संचालित किए थे।

बताया गया है कि उसने तमाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से नौकरी तलाश रहे लोगों का डेटा खरीदा था। प्रति रिकॉर्ड 2 से 8 रुपए तक खर्च कर 33 लाख से अधिक लोगों का डेटा जुटाया गया।

टेली-कॉलर्स कथित तौर पर लोगों को वर्क-फ्रॉम-होम डेटा एंट्री जॉब का लालच देते थे और शुरुआत में 5,000 रुपए जमा कराते थे। बाद में काम में कथित त्रुटियां बताकर पैसे वापस नहीं किए जाते थे। पुलिस का दावा है कि इस तरीके से 750 से अधिक लोगों से 35 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी की गई।

पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप बरामद किया है, जिसमें 33,88,646 ग्राहकों का डेटा और डेटा एंट्री जॉब से जुड़े 266 एग्रीमेंट मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर 'केयर कंपास' नाम का एक फर्जी सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन तैयार किया था।

इसके अलावा पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 14 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 4 सिम कार्ड और 57 सिम कार्ड कवर भी बरामद किए हैं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी लगभग 12 बार दुबई की यात्रा कर चुका है और पहले उसके पास दुबई की नागरिकता भी थी। उस पर सूरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अन्य निवेश धोखाधड़ी मामले में भी शामिल होने का आरोप है, जिसमें 15.44 लाख रुपए की ठगी हुई थी।

इस मामले में पहले ही मिनेश कुमार सोलंकी, अनिल गुप्ता, विकास सिंह भदौरिया और रियाज उर्फ शोएब नामक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी