मेहसाणा, 31 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात के मेहसाणा जिले के सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल तरभ में गुरु गद्दी वलीनाथ महादेव के दिव्य दरबार से समर्पण और अटूट आस्था की एक अद्भुत मिसाल सामने आई है। यहां कच्छ जिले के अंजार तहसील के मोखाना गांव के एक परिवार ने अपने कलेजे के टुकड़े यानी अपने छोटे बेटे को धर्म और सेवा के मार्ग पर समर्पित कर दिया है।
कच्छ के मोखाना गांव के निवासी विसाभाई करमशीभाई नागजीभाई और उनके परिवार ने अपने छोटे बेटे 'श्रीयांश' को वलीनाथ अखाड़े में ईश्वर और धर्म सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ वलीनाथ धाम पहुंचे। इस परिवार ने अपने लाडले को प्रभु चरणों में सौंपकर त्याग और उच्च आस्था का एक अनोखा उदाहरण पेश किया है।
बच्चे को अर्पित करने की इस धार्मिक विधि के बाद, वलीनाथ अखाड़े के गादीपति पूज्य महंत श्री जयरामगिरी बापू द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से बालक का नामकरण किया गया। बापू ने इस बालक का नया नाम 'श्रीयांशगिरी' रखा है। अब यह बालक वलीनाथ धाम में पूज्य बापू के सानिध्य में रहकर धर्म, संस्कृति और सेवा के संस्कार प्राप्त करेगा। इस घटना ने पूरे क्षेत्र और श्रद्धालुओं में भारी कौतुक और गहरी श्रद्धा का भाव जगा दिया है।
मामले पर बात करते हुए जयरामगिरी बापू ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में धर्म के कार्यों के लिए इस गद्दी को 5 बालक समर्पित किए जा चुके हैं, जो आने वाले समय में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और सेवा का कार्य करेंगे।
वलीनाथ परंपरा में पुत्र का दान देने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करना और साधु बनकर लोगों का कल्याण करना है। पिछले पांच वर्षों में वलीनाथ धाम में 5 संत अर्पित किए गए हैं। यहां बच्चे को शिक्षा देने के बाद वयस्क होने पर उसकी इच्छा के अनुसार ही संत जीवन में प्रवेश कराया जाता है।
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