गांधीनगर: गुजरात के मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने गुरुवार को कहा कि सचिवालय स्तर पर लिए गए फैसलों का शासन और जनता के कल्याण पर लंबे समय तक असर पड़ता है। ये फैसले लागू होने के बाद भी कई सालों तक लोगों की जिंदगी को प्रभावित करते रहते हैं।
गुजरात के मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने गुरुवार को कहा कि सचिवालय स्तर पर लिए गए फैसलों का शासन और जनता के कल्याण पर लंबे समय तक असर पड़ता है। वह 23 से 25 अप्रैल तक गांधीनगर में सरदार पटेल लोक प्रशासन संस्थान द्वारा राज्य सचिवालय के डिप्टी सेक्रेटरी के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन पर बोल रहे थे।
'प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व को मजबूत बनाना' विषय पर आधारित कार्यक्रम का उद्देश्य बदलती शासन चुनौतियों और तकनीकी बदलावों के बीच अधिकारियों की प्रशासनिक क्षमता बढ़ाना है।
मनोज कुमार दास ने कहा कि सचिवालय के अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यहां लिए गए नीतिगत फैसलों का असर लंबे समय तक बना रहता है। पहले लिए गए फैसले आज भी लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं, इसलिए निर्णय हमेशा सही और सटीक होने चाहिए।
उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सिस्टम शासन को तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों को लगातार सीखते रहना और खुद को अपडेट रखना जरूरी है।
उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर भी जोर दिया, ताकि लोगों को सरकारी सेवाएं लेने में अनावश्यक कागजी प्रक्रियाओं से राहत मिल सके। फील्ड स्तर के अधिकारियों और सचिवालय के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, ताकि फैसले जमीन की हकीकत के मुताबिक और जनता के हित में हों।
उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात की प्रशासनिक व्यवस्था को ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ तालमेल में आगे बढ़ना चाहिए। राज्य का जिन क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन है, वहां वैश्विक स्तर हासिल करने और अन्य क्षेत्रों में देश में शीर्ष स्थान पाने का लक्ष्य रखना चाहिए। हर अधिकारी और कर्मचारी इस विकास यात्रा में अहम भूमिका निभाता है और फाइलों को सिर्फ कागज नहीं, बल्कि जनकल्याण का साधन समझना चाहिए।
सामान्य प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. अंजू शर्मा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में लगातार सीखते रहना जरूरी है और शासन व्यवस्था को समय के साथ नई तकनीक और डेटा आधारित तरीकों को अपनाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में एआई, साइबर सुरक्षा और पीएम गति शक्ति पोर्टल जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र शामिल हैं। फैसले पारंपरिक धारणाओं के बजाय डेटा और सबूत के आधार पर लेने चाहिए, जिससे शासन में पारदर्शिता और सटीकता बढ़े। कार्यक्रम में नागरिक केंद्रित प्रशासन, स्वागत शिकायत निवारण प्रणाली, गुड गवर्नेंस इंडेक्स, समयबद्ध निपटान और ‘विकसित गुजरात 2047’ से जुड़ी रणनीतियों पर भी चर्चा होगी।
कार्यक्रम में नेतृत्व विकास और मानसिक संतुलन पर भी सत्र रखे गए हैं, ताकि अधिकारी दबाव की स्थितियों को बेहतर तरीके से संभाल सकें।
एसपीआईपीए के महानिदेशक हरीत शुक्ला ने कहा कि यह प्रशिक्षण अधिकारियों को वर्तमान जिम्मेदारियों और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में पदोन्नति के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। कार्यक्रम प्रशासनिक नियमों, डिजिटल गवर्नेंस, आईएफएमएस के जरिए वित्तीय प्रबंधन और फाइलों के त्वरित निपटान पर मार्गदर्शन देगा।
--आईएएनएस
