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108 कुंडीय यज्ञ में 1200 महिलाओं ने राष्ट्र वंदन की दी आहुति, वैदिक मंत्रों से गूंजा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय परिसर

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 1200 महिलाओं का राष्ट्र वंदन यज्ञ
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ग्रेटर नोएडा, 19 सितंबर (आईएएनएस)। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय परिसर शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार, हवन की पवित्र अग्नि और राष्ट्र वंदन के स्वर से गूंज उठा। यहां प्रेरणा विमर्श 2026 के शुभारंभ अवसर पर 108 कुंडीय ‘नारी शक्ति राष्ट्र वंदन यज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया। यज्ञ में करीब 1200 माताओं और बहनों ने सहभागिता की और राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति, उन्नति तथा सामाजिक कल्याण के लिए वैदिक मंत्रों के बीच आहुतियां अर्पित कीं। यज्ञ के दौरान विश्वविद्यालय परिसर का वातावरण आध्यात्मिक और भव्य नजर आया।

एक साथ 108 हवन कुंडों में प्रज्ज्वलित अग्नि, सामूहिक वैदिक मंत्रोच्चार और बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। प्रत्येक हवन कुंड पर लगभग 10 से 11 महिलाओं ने एक साथ बैठकर यज्ञ में आहुति दी। महिलाओं ने राष्ट्र के उत्थान और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की मुख्य कार्यवाहिका सीता अन्नदानम गायित्री मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं।

उन्होंने ‘नारी शक्ति: संस्कार, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण का आधार’ विषय पर अपने विचार रखते हुए महिलाओं को राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं, अरुणा सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्षा प्रीति दादू ने की। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले प्रातःकाल गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय परिसर में स्थित भगवान बुद्ध, भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर तथा बौद्ध भिक्षुओं की प्रतिमाओं पर पुष्पार्चन और माल्यार्पण किया गया। यह कार्यक्रम प्रेरणा विमर्श 2026 के संरक्षक एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह द्वारा किया गया।

इसके बाद दिन में विश्वविद्यालय के मुख्य ऑडिटोरियम में लगाई गई भव्य प्रेरणा विमर्श प्रदर्शनी का उद्घाटन सीता अन्नदानम गायित्री ने किया। प्रेरणा विमर्श की सचिव मोनिका चौहान ने बताया कि प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की ओर से प्रत्येक वर्ष प्रेरणा विमर्श के शुभारंभ अवसर पर नारी शक्ति राष्ट्र वंदन यज्ञ का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय से शुरू हुई यह यज्ञ परंपरा लगातार विस्तार हासिल कर रही है। इस वर्ष 108 कुंडों पर करीब 1200 महिलाओं की सहभागिता ने आयोजन को पहले की अपेक्षा अधिक व्यापक और भव्य स्वरूप प्रदान किया है।

मोनिका चौहान ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह सामूहिक संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण की परंपरा से भी जुड़ा है। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण की विचारधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। 'उत्कर्ष: नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ विषय पर आयोजित प्रेरणा विमर्श 2026 में नारी सम्मान, युवा शक्ति, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

आयोजकों के अनुसार, नारी शक्ति राष्ट्र वंदन यज्ञ को इसी व्यापक विमर्श की भावभूमि के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं की सामाजिक भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी को प्रमुखता दी गई।

--आईएएनएस

पीकेटी/डीकेपी