नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ को बड़ी उपलब्धि बताए जाने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। राजद सांसद मनोज झा ने जीडीपी के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक विकास का वास्तविक लाभ तब माना जाएगा, जब उसका असर आम आदमी और गरीब की थाली तक दिखाई दे। उन्होंने दूध, सीएनजी, पेट्रोल-डीजल और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।
मनोज झा ने कहा कि देश में उत्सव का माहौल होने का दावा वास्तविकता से दूर है। अगर जीडीपी का लाभ गरीब की थाली तक नहीं पहुंच रहा है और लोगों की आय में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई है, तो ऐसे आंकड़ों का आम जनता के लिए क्या अर्थ है। आर्थिक व्यवस्था का उद्देश्य व्यापक जनहित और संसाधनों के समान वितरण की दिशा में होना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी की नई रील में 'झूठ की गूंज' के जरिए राहुल गांधी पर निशाना साधे जाने को लेकर भी मनोज झा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे भाजपा के आईटी सेल की रणनीति बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया वीडियो बनाने से देश के युवाओं, खासकर जेनजी की भावनाओं को नहीं समझा जा सकता। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को देश के स्कूलों और विश्वविद्यालयों की वास्तविक स्थिति देखने की जरूरत है। देश की युवा पीढ़ी की समस्याओं और उनकी अपेक्षाओं को समझने के लिए जमीनी हकीकत देखनी होगी।
मुंबई में दूध की कीमत में और दिल्ली में सीएनजी के दाम में हुए वृद्धि का जिक्र करते हुए मनोज झा ने कहा कि महंगाई का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ता है। उन्होंने प्याज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों के साथ पेट्रोल-डीजल के दामों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि घरेलू विमान सेवाओं पर ईंधन की बढ़ती लागत का असर किराए पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सवाल किया कि जब आम आदमी महंगाई से परेशान है, तो इन परिस्थितियों को सरकार किस तरह निराशा से बाहर निकलना बताएगी। आर्थिक आंकड़ों की चर्चा के साथ आम लोगों की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।
राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में दर्ज एफआईआर पर भी मनोज झा ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह मामला उस विवाद से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर मंच के शुद्धिकरण को लेकर विवाद हुआ था। वह उस समय सदन में मौजूद थे, जब खड़गे ने अपनी पीड़ा व्यक्त की थी और जेपी नड्डा को खेद व्यक्त करना पड़ा था। इसके बाद राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाना सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि देश अब मध्ययुगीन मान्यताओं के आधार पर नहीं, बल्कि आधुनिक संवेदनाओं और संविधान की प्राथमिकताओं के आधार पर चलेगा। मनोज झा ने 'झूठ की गूंज' वाले प्रधानमंत्री के बयान को इसी संदर्भ में पलटवार करते हुए पूछा कि आखिर इस मामले में झूठ कौन फैला रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के एससीओ समिट में दिए उस बयान पर भी मनोज झा ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है। मनोज झा ने कहा कि विदेश की धरती पर शांति का संदेश देना अच्छी बात है, लेकिन अमेरिका को भी ऐसी नसीहत दी जानी चाहिए थी। प्रधानमंत्री मोदी का शांति का संदेश सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन देश के भीतर भी इसी तरह की भाषा और राजनीतिक वातावरण की जरूरत है। विदेश में शांति की बात और देश में राजनीतिक विरोधियों के लिए 'झूठ की गूंज' जैसी शब्दावली का इस्तेमाल एक साथ उचित नहीं लगता।
दिल्ली की कानून-व्यवस्था को लेकर भी मनोज झा ने सरकार को घेरा। उन्होंने नोएडा से दिल्ली तक एक युवती के साथ बस में कथित गैंगरेप की घटना, हत्याओं और स्कूलों में हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता में सुरक्षा को लेकर नाराजगी है। दिल्ली में भाजपा की सरकार को 'चार इंजन' वाली सरकार बताया जाता है, ऐसे में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी सरकार की ही है। मनोज झा ने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि ऐसी घटनाओं पर उनकी प्रतिक्रिया क्या है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन ऐसी गंभीर घटनाओं पर भी उन्हें स्पष्ट रूप से सामने आकर बोलना चाहिए। मनोज झा ने प्रधानमंत्री से अपेक्षा जताई कि वे जनता को भरोसा दिलाएं कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार ठोस कदम उठाएगी।
--आईएएनएस
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