गांधीनगर, 7 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना के तहत धान खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीक का उपयोग शुरू किया है।
गुजरात राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के दौरान अहमदाबाद, महिसागर, आनंद और पंचमहल जिलों के 10 खरीद केंद्रों पर एआई आधारित ग्रेन एनालाइजर मशीनें लगाई थीं।
इस पायलट परियोजना के तहत कुल 13,334 किसानों ने पंजीकरण कराया, जबकि 6,191 धान के नमूनों का एआई तकनीक के जरिए परीक्षण किया गया।
जांच किए गए नमूनों में से 3,379 नमूने (54.6 प्रतिशत) ग्रेड-ए श्रेणी के पाए गए, जबकि 2,812 नमूने (45.4 प्रतिशत) कॉमन ग्रेड के रहे। कुल 341 नमूने खारिज किए गए। सबसे अधिक अस्वीकृति दर ढोलका में 24 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि वीरमगाम में एक भी नमूना खारिज नहीं हुआ।
इन 10 खरीद केंद्रों में महिसागर जिले के लुनावाडा और संतरामपुर, आनंद जिले के खंभात और बोरसद, अहमदाबाद जिले के ढोलका, बावला, वीरमगाम और साणंद, तथा पंचमहल जिले के गोधरा और शेहरा शामिल थे। पंजीकरण की संख्या सबसे अधिक खंभात में 2,663 रही, जबकि लुनावाडा में 2,278 पंजीकरण हुए।
एआई ग्रेन एनालाइजर धान के नमूनों में बाहरी अशुद्धियां, क्षतिग्रस्त या रंग बदले हुए दाने, अपरिपक्व या सिकुड़े हुए दाने, अन्य अनाजों की मिलावट, और नमी की मात्रा मानकों की जांच करते हैं।
इस प्रणाली को चलाने के लिए प्रत्येक खरीद केंद्र पर लगातार बिजली आपूर्ति और एक ऑपरेटर की आवश्यकता होती है।
निगम के अनुसार, वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही थर्ड-पार्टी ग्रेडिंग व्यवस्था में नमूना संग्रह और जांच के लिए दो कर्मचारियों की जरूरत होती है और बिजली न होने की स्थिति में भी वैज्ञानिक उपकरणों के जरिए परीक्षण करना पड़ता है।
राज्य में वर्तमान में एमएसपी प्रणाली के तहत गेहूं, धान, मक्का, ज्वार, बाजरा और रागी की खरीद की जाती है।
गेहूं और चावल की खरीद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के मानकों के अनुसार होती है, जबकि अन्य फसलों की खरीद केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म स्पेसिफिकेशन के आधार पर की जाती है।
गुजरात राज्य नागरिक आपूर्ति निगम राज्य की नोडल एजेंसी है, जो बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे जाने पर किसानों से अधिसूचित फसलों की खरीद करती है।
निगम ने बताया कि उसकी गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था केवल खरीद तक सीमित नहीं है। वह गेहूं, चावल, धान, बाजरा, ज्वार, रागी, तूर दाल, चना, मूंगफली तेल, डबल फोर्टिफाइड नमक और एम-30 सफेद चीनी की खरीद और वितरण भी करता है।
तूर दाल, चना, खाद्य तेल, चीनी और डबल फोर्टिफाइड नमक के लिए निगम ने ऐसे गुणवत्ता मानक तय किए हैं, जिन्हें वह भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों से भी अधिक सख्त बताता है।
तूर दाल और चने की ढुलाई करने वाले ट्रकों को एक बार उपयोग होने वाली विशेष सील से बंद किया जाता है। गोदाम प्रबंधकों द्वारा लिए गए नमूनों की बाद में फूड रिसर्च लैबोरेटरी में 100 प्रतिशत जांच की जाती है।
निगम का कहना है कि एआई आधारित मूल्यांकन, निर्धारित खरीद मानकों और नमूनों की पूरी जांच के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक स्वच्छ और मिलावट रहित खाद्यान्न पहुंचे तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़े।
--आईएएनएस
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