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एनएफआर के पूर्व डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के खिलाफ ईडी का एक्शन, 3.50 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त

एनएफआर

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने स्वर्गीय रंजीत कुमार बोराह और अन्य लोगों के मामले में 3.50 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है, जो उस समय नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर), मालीगांव, गुवाहाटी में डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के पद पर तैनात थे।

ईडी ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि जब्त की गई संपत्तियों में बिहार के पटना में सोनल जैन के नाम पर एक रेजिडेंशियल फ्लैट (कीमत लगभग 3.28 करोड़ रुपए) और केनरा बैंक में उनके नाम पर एक टर्म डिपॉजिट (लगभग 21.24 लाख रुपए) शामिल हैं।

ईडी ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई), एसी-I, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7 और 8 के तहत रंजीत कुमार बोराह और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थी।

इनपर आरोप था कि उन्होंने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के कॉन्ट्रैक्ट देने और उन्हें पूरा करने में प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टरों को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले अवैध रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार किया। सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को रिश्वत की रकम की डिलीवरी को रोका, आरोपियों को गिरफ्तार किया और बाद में 2022 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की। ​​

ईडी की जांच से पता चला कि रंजीत कुमार बोराह ने रेलवे कॉन्ट्रैक्टर फर्म सनशाइन के मालिक चिंतन जैन और नयन चंद्र जैन से रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार किया और रिश्वत की रकम उनके पास रखी। अपराध से प्राप्त इस रकम का इस्तेमाल सनशाइन के नाम पर प्लेटिनम टावर्स, गुरुग्राम, हरियाणा में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया था।

जांच में यह भी पता चला कि उक्त फ्लैट 2024 में लगभग 3.5 करोड़ रुपए में बेचा गया था और बिक्री से प्राप्त रकम को सनशाइन, चिंतन जैन और उनकी पत्नी के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया था। सोनाल जैन और आखिर में इनका इस्तेमाल पटना में बताए गए रिहायशी फ्लैट को खरीदने के लिए लिए गए होम लोन को चुकाने और सोनाल जैन के नाम पर केनरा बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के लिए किया गया।

इस तरह जब्त की गई संपत्तियां स्वर्गीय रंजीत कुमार बोराह द्वारा अपराध से कमाई गई रकम के दोबारा निवेश और एकीकरण को दर्शाती हैं। जांच के दौरान 6 सितंबर 2024 को रंजीत कुमार बोराह का निधन हो गया। पीएमएलए के तहत जब्ती की कार्यवाही खुद उस संपत्ति के खिलाफ होती है, जो अपराध से जुड़ी है, इसलिए संपत्तियों के मौजूदा मालिक के खिलाफ जब्ती की कार्यवाही की गई है।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी