अनंतनाग, 7 सितंबर (आईएएनएस)। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के जम्मू और कश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष विवेक बाली ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला ऐसी ताकतों को मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे हिंदू अधिकारियों को भी थ्रेट लेटर आए।
दरअसल, फारूक अब्दुल्ला ने हाल ही में कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों को एक राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा था कि अगर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, तो घाटी में तैनात अन्य वरिष्ठ हिंदू अधिकारियों जैसे डीआईजी, डीजी, एसपी और डीसी को ऐसी धमकियां क्यों नहीं मिल रहीं। उनके इस बयान को लेकर भाजपा और उसके सहयोगी दल लगातार हमलावर हैं।
विवेक बाली ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "जिस तरह से फारूक अब्दुल्ला ने बयान दिया है उससे लगता है कि कहीं न कहीं ये आतंकी ताकतों को मैसेज देना चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में तैनात हिंदू अधिकारियों को भी थ्रेट लेटर आए, ताकि इनको भी जम्मू-कश्मीर से बाहर जाने का रास्ता दिखाया जाए।"
उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को चेतावनी देते हुए कहा, "यह जम्मू-कश्मीर पुलिस है। यह तब जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ थी, जब आप 1990 में लंदन चले गए थे। यह वही जम्मू-कश्मीर पुलिस है जिसने इतनी शहादतें दी हैं।"
बाली ने कहा कि यह वही जम्मू-कश्मीर पुलिस है जिसने कश्मीरी पंडितों को सुरक्षित बाहर निकालने का रास्ता बनाया था। फारूक अब्दुल्ला साहब शायद 1990 से बाहर नहीं निकले हैं। यह 2026 है और यह वह भारत है जहां पीएम मोदी अपने हिसाब से काम करते हैं और जितनी भी सिक्योरिटी एजेंसियां हैं, उनके साथ खड़े रहते हैं।
उन्होंने कहा, "यह वह जम्मू-कश्मीर नहीं है, यह वह भारत नहीं है जो 1990 में था। आज यह नया जम्मू-कश्मीर है, जहां इंडियन आर्मी, जम्मू-कश्मीर पुलिस और बाकी एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और यह किसी से डरने वाली नहीं है। जो आप मैसेज देने का काम कर रहे हैं, वह मैसेज देना बंद कीजिए।"
विवेक बाली ने 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन की जांच की मांग करते हुए कहा कि उस समय जो हालात बने, उसकी पूरी जांच होनी चाहिए कि आखिर कौन लोग जिम्मेदार थे और किस तरह से कश्मीरी पंडितों को घाटी से बाहर जाने पर मजबूर किया गया।
उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड द्वारा जल्द नया निकाहनामा लागू करने और बिना तलाक दूसरा निकाह नहीं करा सकने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए विवेक बाली ने कहा कि वह उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के इस फैसले का स्वागत करते हैं।
उन्होंने कहा, "यह कानून आज से 10-20 साल पहले आ जाना चाहिए था। चलिए, देर आए दुरुस्त आए। आज उन मांओं को, उन बहनों को, उन बेटियों को आज अपना हक मिला है।"
बाली ने कहा, "पहले एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार-चार शादियां होती थीं। ऐसे में उत्तराखंड सरकार का फैसला स्वागत योग्य है।"
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और वह खुद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का स्वागत करते हैं और आने वाले समय में उत्तराखंड ही नहीं, पूरे जम्मू-कश्मीर और पूरे देश में जितने भी राज्य हैं, वहां ऐसा कानून आना चाहिए।
--आईएएनएस
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