नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली के दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस ने एक ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा किया है। पुलिस ने एक 64 वर्षीय व्यक्ति और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। इन पर एक 38 वर्षीय व्यक्ति की हत्या का आरोप है।
आरोपियों की पहचान 64 वर्षीय तालुकदार अंसारी और 49 वर्षीय मोहम्मद वसीम उर्फ अकरम के तौर पर हुई है। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित गुल हसन को डॉक्टर के पास ले जाने के बहाने एक सुनसान कंटेनर में ले जाया गया, जहां उसके साथ मारपीट की गई और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई।
पुलिस के अनुसार, 23 अगस्त को शाम करीब 7:13 बजे एक अज्ञात शव के बारे में सूचना मिली। शव कालिंदी कुंज पुलिस स्टेशन के इलाके में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से करीब 500 मीटर पूर्व और कच्ची कॉलोनी, गली नंबर 1 के पास एनटीपीसी दीवार के नजदीक एक सुनसान कंटेनर में मिला, जिसे स्थानीय लोग बबलू का कंटेनर कहते हैं।
सूचना मिलने के बाद, कालिंदी कुंज थाने के एसएचओ पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। पीड़ित कंटेनर के अंदर पड़ा मिला और उसके सिर पर चोट का निशान था। शव के पास से खून के धब्बों वाला एक कंक्रीट का ब्लॉक भी बरामद किया गया।
शुरुआती जांच के दौरान, पुलिस ने पीड़ित के सिर के बाईं ओर कनपटी पर चोट देखी। यह चोट मौके पर मिले खून लगे कंक्रीट ब्लॉक से लगी हो सकती है। चूंकि मृतक की पहचान तुरंत नहीं हो पाई थी, इसलिए पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
घटना की गंभीरता को देखते हुए, पीड़ित की पहचान करने और अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए चार टीमें बनाई गईं। इन टीमों में कालिंदी कुंज पुलिस स्टेशन, स्पेशल स्टाफ, नारकोटिक्स और एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (एएटीएस) के जवान शामिल थे।
इस जांच का नेतृत्व सरिता विहार एसीपी अनिल कुमार शर्मा ने किया। यह जांच दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपीविनीत कुमार (आईपीएस) की देखरेख और दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त विजय कुमार (आईपीएस) के मार्गदर्शन में की गई। शुरुआत में न तो पीड़ित की पहचान पता थी और न ही उसकी मौत के हालात, इसलिए जांच करने वालों के सामने एक बड़ी चुनौती थी।
इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, टेक्निकल सर्विलांस, खुफिया जानकारी और जमीनी स्तर पर जांच-पड़ताल का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर जांच की। जांच करने वालों ने उस इलाके और उसके आस-पास लगे कई कैमरों की फुटेज देखी और कैमरे-दर-कैमरे के रास्ते से पीड़ित की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की।
कई दिनों तक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के बाद, पुलिस को एक अहम सुराग मिला। फुटेज में पीड़ित को दो अन्य लोगों के साथ उस जगह की ओर जाते हुए देखा गया जहां बाद में उसका शव मिला। इसके बाद संदिग्धों का पता गोविंदपुरी की एक सिलाई फैक्ट्री में चला, जहां पुलिस ने तालुकदार अंसारी और मो. वसीम उर्फ अकरम को पकड़ा।
पूछताछ के दौरान पता चला कि तालुकदार अंसारी का बेटा गुल हसन सिज़ोफ्रेनिया और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याओं से पीड़ित था। आरोपियों ने गुल हसन को डॉक्टर के पास ले जाने के बहाने एक सुनसान कंटेनर तक अपने साथ चलने के लिए राजी किया। सुनसान जगह पर पहुंचने के बाद वसीम ने पत्थर से गुल हसन पर हमला किया। घटना के दौरान तालुकदार अंसारी ने भी अपने बेटे के साथ मारपीट की। इसके बाद बेकार कपड़ों से बनी रस्सी से गला घोंटकर पीड़ित की हत्या कर दी गई। फिर आरोपी शव को उस सुनसान कंटेनर में छोड़कर इलाके से चले गए।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद अपराध से जुड़ी कई चीजें बरामद की गईं। इनमें हमले के दौरान इस्तेमाल किया गया कंक्रीट का पत्थर, घटना के समय आरोपियों द्वारा पहने गए खून से सने कपड़े और पीड़ित का गला घोंटने के लिए इस्तेमाल की गई रस्सी शामिल हैं।
पुलिस ने कहा कि हत्या के पीछे की पूरी वजह का पता लगाने, फोरेंसिक और तकनीकी सबूतों के जरिए घटनाओं के कथित क्रम की पुष्टि करने, अंतिम मेडिकल राय लेने और मामले के लिए जरूरी अतिरिक्त सबूत इकट्ठा करने के लिए आगे की जांच चल रही है।
--आईएएनएस
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