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रक्षा निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव, भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार का रास्ता आसान

रक्षा

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस) भारत सरकार ने रक्षा निर्यात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव रक्षा क्षेत्र में निर्यात को बढ़ावा देने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में तेजी से कारोबार करने में सक्षम बनाने के लिए गए हैं।

रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा निर्यात की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) व्यवस्था को सरल कर दिया है। इन सुधारों का उद्देश्य प्रक्रियागत बोझ कम करना व निर्यात मंजूरी को आसान बनाना है। साथ ही भारत को विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण एवं निर्यात केंद्र के रूप में मजबूत करना है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में ये बदलाव किए गए हैं। इनसे भारतीय रक्षा कंपनियों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अंतरराष्ट्रीय निविदाओं, प्रदर्शनियों और विदेशी बाजारों तक तेजी से पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही संवेदनशील देशों, महत्वपूर्ण तकनीकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जरूरी सुरक्षा प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। नई व्यवस्था के तहत अधिकांश देशों को गैर-घातक रक्षा सामान के निर्यात के लिए हितधारकों से परामर्श की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। हालांकि संवेदनशील देशों के मामले में आवश्यक सुरक्षा उपाय जारी रहेंगे।

इसी तरह अंतरराष्ट्रीय निविदाओं और रक्षा प्रदर्शनियों के लिए सभी तरह के रक्षा सामान के निर्यात में भी हितधारक परामर्श की जरूरत नहीं होगी। इससे भारतीय कंपनियां विदेशी निविदाओं में तेजी से भाग ले सकेंगी। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपने रक्षा उत्पादों को कम प्रक्रियागत देरी के साथ प्रदर्शित कर सकेंगी।

सरकार ने ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस यानी ओजीईएल व्यवस्था को भी काफी सरल और व्यापक बनाया है। ओजीईएल एक ऐसी स्थायी और एकमुश्त निर्यात मंजूरी है, जिसके तहत पात्र कंपनियां तय रक्षा सामान की कई खेपों के लिए अलग-अलग निर्यात मंजूरी लेने के बजाय स्वयं निर्यात प्राधिकरण तैयार कर सकती हैं। इससे हर खेप के लिए अलग अनुमति लेने की जरूरत कम होती है।

कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के साथ कारोबार करने में अधिक लचीलापन मिलता है। पहले प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म और उपकरण, कलपुर्जों एवं घटकों तथा कंपनियों के बीच तकनीक हस्तांतरण से संबंधित तीन अलग ओजीईएल एसओपी लागू थीं। अब इन तीनों को मिलाकर एकीकृत ओजीईएल एसओपी बनाई गई है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इससे निर्यातकों को एक समान और सरल नियमों के तहत काम करने की सुविधा मिलेगी। वहीं सरकार ने ओजीईएल की वैधता अवधि भी 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी है। इससे कंपनियों को बार-बार लाइसेंस का नवीनीकरण कराने की जरूरत कम होगी। अनुपालन से जुड़ी प्रक्रियागत लागत एवं समय की बचत होगी। ओजीईएल के तहत निर्यात किए जा सकने वाले देशों का दायरा भी काफी बढ़ाया गया है।

पहले यह सुविधा 41 देशों तक सीमित थी। अब इसे बढ़ाकर सभी देशों तक किया गया है। हालांकि नकारात्मक या संवेदनशील देशों तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंध या हथियार प्रतिबंध झेल रहे देशों को इससे बाहर रखा गया है। इस बदलाव से भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए संभावित विदेशी बाजारों का दायरा काफी व्यापक हो जाएगा।

नई व्यवस्था में उन भारतीय कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है, जिनके विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं, यानी एफओईएम के साथ लंबे समय के अनुबंध या समझौते हैं। निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर ऐसे भारतीय निर्यातकों को संबंधित एफओईएम और पात्र सामान के लिए ओजीईएल दिया जा सकेगा। इसकी वैधता संबंधित अनुबंध या समझौते की अवधि के अनुरूप रखी जा सकेगी।

इससे पात्र कंपनियों को पहले की तुलना में ज्यादा प्रकार के रक्षा सामान के निर्यात की सुविधा मिलेगी। संशोधित व्यवस्था में छोटे कैलिबर के हथियारों के कुछ निर्धारित कलपुर्जों और घटकों तथा सुरक्षा उपकरणों के नागरिक उपयोग के लिए निर्यात की भी अनुमति दी गई है।

इससे भारतीय कंपनियों के लिए वैध अंतरराष्ट्रीय कारोबारी अवसरों का दायरा और बढ़ेगा। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन सुधारों का मकसद निर्यात नियमों को पूरी तरह ढीला करना नहीं, बल्कि नियमित और कम जोखिम वाले मामलों में अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटाना है।

संवेदनशील रक्षा सामान, महत्वपूर्ण तकनीक और संवेदनशील देशों से जुड़े निर्यात के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय बरकरार रहेंगे। ये सुधार ऐसे समय किए गए हैं जब भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसी अवधि में देश का रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

--आईएएनएस

जीसीबी/एसके