CP Radhakrishnan : कलबुर्गी केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति बोले-तकनीक सीखो, चुनौतियों को अवसर में बदलो

दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संबोधन, युवाओं से नवाचार और राष्ट्र निर्माण की अपील
कलबुर्गी केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति बोले-तकनीक सीखो, चुनौतियों को अवसर में बदलो

कलबुर्गी: कलबुर्गी स्थित कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय में बुधवार को आयोजित 10वें दीक्षांत समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने स्नातक हो रहे छात्रों को बधाई दी और कहा कि अब वे जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां उनके ऊपर समाज और देश की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारत की विकास यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि देश इस समय एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” के विजन का उल्लेख करते हुए इसे एक सामूहिक राष्ट्रीय लक्ष्य बताया। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे नवाचार करें, ईमानदारी से नेतृत्व करें और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा पर भी जोर दिया और कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब है देश की अपनी क्षमताओं का सही उपयोग करना, नए विचारों को बढ़ावा देना और स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाना। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आज के बदलते समय में युवाओं को नई तकनीकों को सीखते रहना चाहिए और खुद को समय के अनुसार ढालते रहना चाहिए।

महिला सशक्तीकरण पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने खुशी जताई कि इस विश्वविद्यालय में इस वर्ष 80 प्रतिशत से अधिक स्वर्ण पदक विजेता छात्राएं हैं। उन्होंने इसे “नारी शक्ति” की बढ़ती ताकत का प्रतीक बताया और कहा कि यह समाज में समानता और नेतृत्व की दिशा में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

उन्होंने कहा कि जहां दुनिया में अवसरों की कोई कमी नहीं है, वहीं कई चुनौतियां जैसे जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव और सामाजिक असमानताएं भी मौजूद हैं। उन्होंने छात्रों से इन चुनौतियों का सामना साहस और रचनात्मक सोच के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि सफलता का आकलन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव से होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और वैश्विक सोच अपनाने के साथ-साथ अपनी परंपराओं और मूल्यों को भी नहीं भूलना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को सही दिशा देने में इन सभी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अंत में उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

इस कार्यक्रम में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्य नारायण, शिक्षक, कर्मचारी, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

--आईएएनएस

 

 

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