Advertisement banner

‘शुद्धीकरण’ विवाद पर कांग्रेस और शिवसेना का भाजपा-आरएसएस पर हमला, पंजाब में विरोध प्रदर्शन का ऐलान

‘शुद्धीकरण’

फरीदकोट/अमरावती, 30 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित ‘शुद्धीकरण’ को लेकर सियासी विवाद लगातार गहरा रहा है। कांग्रेस नेता सुधीर चौधरी और शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने इस मुद्दे पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आलोचना करते हुए इसे सामाजिक समानता और संविधान की भावना के खिलाफ बताया है।

फरीदकोट में कांग्रेस नेता सुधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा की विचारधारा मनुस्मृति आधारित व्यवस्था को दोबारा स्थापित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने देश को ऐसी सामाजिक व्यवस्था से मुक्ति दिलाई थी, लेकिन अब फिर उसी मानसिकता को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

चौधरी ने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे और सभा को संबोधित करने के बाद जिस तरह कथित शुद्धीकरण की घटना सामने आई, वह छुआछूत की मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने ऐलान किया कि इस मामले को लेकर पूरे पंजाब में धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे। चौधरी ने कहा कि जब तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इक्कीसवीं सदी में इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के लिए चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं और इससे एक विशेष मानसिकता उजागर होती है।

वहीं, अमरावती में शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने भी इस विवाद को लेकर भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर किसी सार्वजनिक स्थल को किसी नेता के जाने के बाद धोया जाता है, तो इससे जातिगत भेदभाव का संदेश जाता है। सावंत ने सवाल उठाया कि क्या किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर देखा जाना उचित है।

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान समानता का अधिकार देता है और जाति, धर्म तथा पंथ के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। सावंत ने आरोप लगाया कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली मानसिकता को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान का जिक्र करते हुए सावंत ने कहा कि देश में सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने नेताओं से समाज को जोड़ने वाले संदेश देने की अपील की।

--आईएएनएस

एएमटी/एमएस