नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उन खबरों का स्वतः संज्ञान लिया है, जिनके अनुसार छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में दर्जनों स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए एक अधूरे पुल से जुड़ी संकरी और फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी का इस्तेमाल करके नदी पार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी अगर सच है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। इसे देखते हुए, देश की सबसे बड़ी मानवाधिकार संस्था ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ़्ते के अंदर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मैनपुर ब्लॉक इलाके के खंभाथा और आस-पास की बस्तियों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए पैरी नदी पार करने के लिए एक अधूरे पुल पर लगी लोहे की सीढ़ी पर चढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कम गहरी यह नदी मानसून के दौरान उफान पर आ जाती है, जिससे बच्चों के लिए इसे पार करना बहुत खतरनाक हो जाता है।
3 सितंबर को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मैनपुर ब्लॉक में देहारगुडा और खंभाथा के बीच लगभग 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य पिछले छह साल से चल रहा है। बताया जाता है कि संबंधित अधिकारियों ने लगभग एक साल पहले ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि पुल का काम छह महीने में पूरा हो जाएगा। हालांकि, निर्माण कार्य अभी भी अधूरा है, जिससे स्कूली बच्चे और स्थानीय निवासी खतरनाक रास्ते से नदी पार करने को मजबूर हैं।
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित एनएचआरसी (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग) एक स्वायत्त वैधानिक संस्था है, जो मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसका मुख्य काम मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देना है। मानवाधिकारों का अर्थ है जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान से जुड़े अधिकार, जिनकी गारंटी संविधान देता है या जो अंतरराष्ट्रीय समझौतों में शामिल हैं और जिन्हें भारत की अदालतों में लागू कराया जा सकता है।
देश की इस शीर्ष मानवाधिकार संस्था के पास यह अधिकार है कि वह मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत मिले बिना भी मीडिया रिपोर्ट, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई कर सकती है।
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