चेन्नई, 23 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में बन रहे मामल्लन जलाशय प्रोजेक्ट को लेकर जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) और मत्स्य विभाग के बीच विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मत्स्य विभाग से जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए बिना ही निर्माण कार्य आगे बढ़ा दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित पेयजल जलाशय का लगभग 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
मत्स्य विभाग ने अभी तक अपनी मंजूरी नहीं दी है और डब्ल्यूआरडी से प्रोजेक्ट का मछुआरा समुदाय पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन करने के लिए अतिरिक्त जानकारी मांगी है।
यह जलाशय ईस्ट कोस्ट रोड और ओल्ड महाबलीपुरम रोड के बीच कोवलम सब-बेसिन में बनाया जा रहा है। लगभग 5,161 एकड़ में फैला यह जलाशय 2.25 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी की वार्षिक भंडारण क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है और इससे चेन्नई की पेयजल आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने जनवरी में इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी।
लगभग छह महीने तक निर्माण चलने के बाद डब्ल्यूआरडी ने औपचारिक रूप से 21 जुलाई को अतिरिक्त मत्स्य और मछुआरा कल्याण निदेशक से संपर्क कर एनओसी मांगी। इस देरी ने सरकार के अंदर चिंता बढ़ा दी है, खासकर इसलिए क्योंकि प्रोजेक्ट समुद्र तट के पास स्थित है और इससे लगभग 5,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि डब्ल्यूआरडी को निर्माण शुरू करने से पहले मत्स्य विभाग से सलाह लेनी चाहिए थी और उसकी मंजूरी हासिल करनी चाहिए थी। अधिकारी ने कहा, "जब कोई बड़ा प्रोजेक्ट तट के करीब हो और मछुआरों की आजीविका पर असर डालता हो, तो पहले से मंजूरी और सही एनओसी लेना जरूरी है। जरूरी मंजूरी लिए बिना निर्माण शुरू करने देना एक गलती थी।"
अधिकारी ने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रोजेक्ट का उद्घाटन हो चुका था और काफी काम पूरा हो गया था, तो डब्ल्यूआरडी ने जुलाई तक अपनी अर्जी क्यों नहीं दी।
मत्स्य विभाग के अनुसार, जलाशय के संभावित पर्यावरणीय और आजीविका प्रभावों की जांच के लिए और जानकारी की जरूरत है। अधिकारियों ने कहा कि जानकारी के लिए बार-बार अनुरोध करने के बावजूद डब्ल्यूआरडी से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। विभाग जरूरी दस्तावेज मिलने और उनकी जांच के बाद ही मंजूरी और लगाई जाने वाली शर्तों पर फैसला करेगा।
इस विवाद ने बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में विभागों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनओसी लंबित रहने के बावजूद निर्माण जारी रहने से अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या डब्ल्यूआरडी को प्रोजेक्ट में बदलाव करना होगा या प्रभावित मछुआरा समुदायों के लिए सुरक्षा उपाय करने होंगे।
--आईएएनएस
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