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चावल आवंटन घोटाले में सीबीआई ने दर्ज किया केस, कई अधिकारी जांच के घेरे में

चावल

नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। सस्ते दाम पर चावल के आवंटन में गड़बड़ी को लेकर सीबीआई ने केस दर्ज किया है। यह मामला भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) दिल्ली के तत्कालीन अधिकारियों, नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनईआरएएमएसी) के तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर और अधिकारियों, कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है।

दरअसल, इस पूरे मामले का खुलासा जून महीने में हुआ था, जब उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की विजिलेंस रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट में गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद चावल के आवंटन की जांच के लिए एक न्यूट्रल कमेटी बनाई गई थी।

कमेटी को यह जांच करनी थी कि एफसीआई ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत राज्य सरकारों को चावल बेचने वाली कैटेगरी में एनईआरएएमएसी को चावल का आवंटन कैसे कर दिया।

जांच में सामने आया कि एफसीआई दिल्ली रीजन ने एनईआरएएमएसी को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था। इसमें से एनईआरएएमएसी ने 50,645 मीट्रिक टन चावल उठा भी लिया। यह चावल उसे 23,200 रुपए प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर दिया गया जबकि उस समय चावल की बाजार या रिजर्व कीमत करीब 28,900 रुपए प्रति मीट्रिक टन थी।

जांच के मुताबिक नियमों के तहत एनईआरएएमएसी, बिना ई-ऑक्शन के इस तरह चावल लेने की पात्र ही नहीं थी। बिना ई-ऑक्शन चावल आवंटित करने की सुविधा सिर्फ राज्य सरकारों और राज्य सरकार की कॉरपोरेशन के लिए थी, केंद्र सरकार की कंपनी के लिए नहीं।

मामले में एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई। चावल के आवंटन का पैसा सीधे एनईआरएएमएसी से नहीं आया बल्कि अलग-अलग निजी कंपनियों के जरिए भेजा गया। इनमें चावल मिलर्स और होलसेल डीलर्स शामिल थे।

इतना ही नहीं, जांच के दौरान ऐसा कोई रिकॉर्ड भी नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि एनईआरएएमएसी को दिया गया चावल उसी तय मकसद के लिए जनता में बांटा गया था, जिसके नाम पर यह आवंटन किया गया था।

इसके अलावा चावल का पुराना स्टॉक पहले निकालने के लिए लागू एफआईएफओ (फर्स्ट इन फर्फ्स आउट) नियम का भी पालन नहीं किया गया।

विजिलेंस रिपोर्ट के मुताबिक अगर एनईआरएएमएसी को रियायती दर पर दिए गए चावल की यही मात्रा 28,900 रुपए प्रति मीट्रिक टन की रिजर्व कीमत पर ई-ऑक्शन के जरिए बेची जाती, तो एफसीआई को करीब 28.87 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फायदा होता। इस हिसाब से सरकार को सीधा नुकसान पहुंचाया गया। सीबीआई ने अब इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम