नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक शिकायत पर ध्यान दिया है। शिकायत में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में हुए 'चलो संसद' विरोध प्रदर्शन के दौरान बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान 12 साल की एक लड़की के सिर में चोट लग गई।
सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने दिल्ली सरकार के समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव; केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव; और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किए हैं। उनसे इन आरोपों की जांच करने और दो सप्ताह के अंदर 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' (एटीआर) सौंपने को कहा गया है।
यह कार्रवाई 'मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993' की धारा 12 के तहत शुरू की गई है, जो मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की जांच करने का अधिकार शीर्ष मानवाधिकार संस्था को देती है। शिकायत के अनुसार, सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों को खतरे में डाला गया था; खबरों में दावा किया गया है कि 12 साल की एक लड़की के सिर में चोट लगी थी।
शिकायतकर्ता ने एनएचआरसी से दखल देने की मांग की और बच्चे को तुरंत बचाने और उसका इलाज कराने, कानून के मुताबिक उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश करने, बच्चे को विरोध प्रदर्शन में लाने वाले व्यक्ति की पहचान करने और 'किशोर न्याय अधिनियम' के तहत उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
शिकायत में यह भी मांग की गई कि अगर किसी अधिकारी ने बच्चे के साथ बदसलूकी की है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही, यह आरोप लगाया गया कि पत्रकार सौरव दास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर फैलाई गई जानकारी गलत या गुमराह करने वाली हो सकती है। संस्था से आग्रह किया गया कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके और प्लेटफॉर्म के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।
शिकायत की जांच करने के बाद, एनएचआरसी ने पाया कि आरोप प्रथम दृष्टया बच्चे के मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े लगते हैं। इसके अनुसार, शीर्ष मानवाधिकार संस्था ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तुरंत बच्चे को बचाएं, जरूरी इलाज सुनिश्चित करें और कानून के मुताबिक उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश करें।
संस्था ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे बच्चे को विरोध प्रदर्शन में लाने वाले व्यक्ति की पहचान करें और 'किशोर न्याय अधिनियम' के तहत उचित कार्रवाई करें।
शीर्ष मानवाधिकार संस्था ने यह भी आदेश दिया कि अगर किसी अधिकारी द्वारा बच्चे के साथ बदसलूकी किए जाने का मामला सामने आता है, तो उचित कार्रवाई शुरू की जाए।
इसके अलावा, एनएचआरसी ने निर्देश दिया कि अगर सौरव दास द्वारा 'एक्स' पर फैलाई गई जानकारी गलत या गुमराह करने वाली पाई जाती है, तो उनके और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए और दो सप्ताह के अंदर विस्तृत 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' सौंपी जाए। इस बीच, विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर सफाई दी और ऑनलाइन फैल रहे उन दावों को गलत बताया जिनमें कहा गया था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान एक 12 साल की लड़की के सिर में चोट लगी और 40 से 50 अन्य लोगों के सिर में भी चोटें आईं।
वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक फैक्ट-चेक पोस्ट में कहा, "यह जानकारी गलत है। पोस्ट में किए जा रहे दावे सच नहीं हैं। कृपया गलत या गुमराह करने वाली जानकारी न फैलाएं और न ही उसे आगे बढ़ाएं।"
इस पूरे मामले पर प्रियंक कानूनगो ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "हमें एक शिकायत मिली कि सौरव दास नाम के व्यक्ति ने अपने 'एक्स' हैंडल के जरिए दावा किया कि 12 साल की एक लड़की को पीटा गया, उसके बाल पकड़कर घसीटा गया और उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। यह घटना गंभीर लगती है और हमने इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया है। 12 साल की बच्ची को विरोध-प्रदर्शन में कौन लाया? पहला कदम उसकी पहचान करना और उसे सुरक्षित बाहर निकालना होना चाहिए। अगर बच्ची घायल है, तो उसके इलाज का इंतजाम किया जाना चाहिए। इस बीच, हमें यह जानकारी भी मिली कि दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि यह खबर झूठी है। हमने दिल्ली पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर सौरव दास नाम का व्यक्ति गलत जानकारी फैलाने, अशांति पैदा करने, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और इंसानी जान को खतरे में डालने की कोशिश कर रहा है, तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "देखिए, हमारी शिकायत सिर्फ विरोध प्रदर्शन में नाबालिग के इस्तेमाल को लेकर थी। यह जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 83 और 75 का उल्लंघन है। अगर कोई व्यक्ति इस तरह से किसी नाबालिग को विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर लाता है, तो उसे गंभीर कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और जेल भी जाना पड़ सकता है।"
--आईएएनएस
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