चंडीगढ़, 7 सितंबर (आईएएनएस)। पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष फतेह जंग बाजवा ने आम आदमी पार्टी (आप) और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने गुरप्रीत सिंह सेखों के आप में शामिल होने पर पंजाब की कानून-व्यवस्था और युवाओं को दिए जा रहे संदेश पर सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति से जुड़े राज्य सरकार के रुख की आलोचना की। उन्होंने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट की नियुक्ति को लेकर भी पार्टी की अंदरूनी कलह पर टिप्पणी की।
फतेह जंग बाजवा ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर भगवंत मान सरकार के कदम पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाए जाने पर रोक लगाने की कोशिश की, जबकि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार की भूमिका सीमित है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति और शपथ से जुड़ी प्रक्रिया में कॉलेजियम, केंद्रीय कानून मंत्रालय और राज्यपाल जैसे संवैधानिक संस्थानों की भूमिका होती है। मुख्यमंत्री से राज्य के दृष्टिकोण के संबंध में परामर्श लिया जा सकता है, लेकिन सरकार को इस प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
बाजवा ने कहा कि न्यायपालिका को लेकर इस तरह का विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ कुछ जनहित याचिकाएं भी दायर हुई हैं। उन्होंने सरकार के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे कदमों से आम आदमी पार्टी के प्रति पंजाब की जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है। गुरप्रीत सिंह सेखों के आम आदमी पार्टी में शामिल होने पर भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुराने बयानों का हवाला देते हुए हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले आप पंजाब में गैंगस्टरवाद को लेकर शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस पर सवाल उठाती थीं, लेकिन अब ऐसे लोगों को पार्टी में शामिल किया जा रहा है। इससे पंजाब के युवाओं को गलत संदेश जा सकता है। राज्य के कारोबारी, उद्योगपति और आम लोग शांतिपूर्ण माहौल और मजबूत कानून-व्यवस्था चाहते हैं।
उन्होंने गुरप्रीत सिंह सेखों के आपराधिक अतीत का जिक्र करते हुए नाभा जेल ब्रेक का भी हवाला दिया। बाजवा ने कहा कि जिस व्यक्ति का नाम इस तरह के गंभीर मामले से जुड़ा रहा हो, उसे राजनीतिक दल में शामिल करना सवाल खड़े करता है। आप सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और पूछा कि क्या सरकार को लगता है कि लोगों को डराकर राजनीतिक समर्थन हासिल किया जा सकता है?
पंजाब कांग्रेस प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट की नियुक्ति पर बाजवा ने कहा कि यह पार्टी का आंतरिक मामला है, लेकिन इससे पार्टी की अंदरूनी समस्याएं खत्म होने की संभावना कम है। उन्होंने राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच रहे राजनीतिक मतभेदों का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब में भी कांग्रेस के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। उन्होंने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को लेकर पार्टी के भीतर चल रही कथित खींचतान का उल्लेख किया।
बाजवा ने दावा किया कि कांग्रेस में चुनावों से पहले आंतरिक संघर्ष बढ़ जाता है और इससे पार्टी को राजनीतिक नुकसान होता है। उन्होंने 2017 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि बाद में पार्टी की सीटों की संख्या में बड़ी गिरावट आई। यदि कांग्रेस नेता आपस में ही संघर्ष करते रहेंगे तो पार्टी जनता के सामने एकजुट विकल्प के तौर पर कैसे आएगी और चुनाव में सरकार बनाने की स्थिति कैसे हासिल करेगी, यह बड़ा सवाल है।
--आईएएनएस
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