नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक महिला के साथ कथित मारपीट और सार्वजनिक अपमान की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, महिला पर आरोप था कि वह किसी दूसरे पुरुष के साथ घर से चली गई थी, जिसके बाद उसके पति और अन्य रिश्तेदारों ने जबरदस्ती उसके बाल काट दिए, उसे डंडों से पीटा और अर्धनग्न हालत में घुमाया।
एनएचआरसी ने माना है कि अगर मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं, तो इससे पीड़ित के जीवन और सम्मान के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मामला बनता है। इसलिए, एनएचआरसी ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव और बांसवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
उम्मीद है कि इस रिपोर्ट में जांच की स्थिति और पीड़ित को दिए गए मुआवजे (अगर कोई हो) की जानकारी भी शामिल होगी। 4 सितंबर को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना कथित तौर पर 1 सितंबर को हुई थी। यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर घटना का एक वीडियो वायरल हुआ।
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली इस शीर्ष संस्था ने कहा कि महिला के साथ उसके पति और अन्य रिश्तेदारों ने सबके सामने क्रूरता और अमानवीय व्यवहार किया था।
'मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993' के तहत स्थापित एनएचआरसी एक स्वायत्त वैधानिक संस्था है, जो मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के प्रति भारत की चिंता को दर्शाती है। इसका मुख्य काम मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देना है। मानवाधिकारों का अर्थ है व्यक्तियों के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान से जुड़े अधिकार, जिनकी गारंटी संविधान देता है या जो अंतरराष्ट्रीय समझौतों में शामिल हैं और जिन्हें भारत की अदालतों में लागू किया जा सकता है।
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली इस शीर्ष संस्था के पास यह अधिकार है कि वह मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत मिले बिना भी मीडिया रिपोर्ट, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान ले सके।
--आईएएनएस
एससीएच







