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बरेली में दुनिया का पहला देसी गिर गाय नस्ल सुधार कार्यक्रम शुरू, ब्राजील-तंजानिया के वैज्ञानिक पहुंचे

देसी गिर गायों के नस्ल सुधार से किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों को होगा लाभ।
बरेली

बरेली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के बरेली में पशुपालन के क्षेत्र में एक बड़ा और अहम कदम उठाया गया है। यहां देसी गिर गायों की नस्ल सुधारने के लिए दुनिया का पहला भ्रूण प्रत्यारोपण (एम्ब्रियो ट्रांसफर) और जेनॉमिक्स आधारित कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस पहल का मकसद बेहतर गुणवत्ता वाली देसी गायों की संख्या बढ़ाना है। कार्यक्रम में ब्राजील और तंजानिया के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया। इसका आयोजन बीएल एग्रो और लीड्स जेनेटिक्स ने मिलकर किया।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और वन मंत्री अरुण सक्सेना मुख्य रूप से मौजूद रहे। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, "और ज्यादा दूध उत्पादन होगा और जितनी दूध की आवश्यकता है उतना दूध उपलब्ध न होने के कारण जो नकली तरीके से पनीर और अन्य चीजें बनाई जाती हैं, उसमें कमी आएगी। स्वस्थ भारत बनाने का जो प्रधानमंत्री का संकल्प है, 2047 तक विकसित भारत और साथ में स्वस्थ भारत, उसमें इस प्रकार के कार्यक्रम की भी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।"

जब राजेंद्र शुक्ल से पूछा गया कि क्या इस तकनीक को और बढ़ावा मिलना चाहिए तो उन्होंने कहा कि आरएंडडी के बाद जो एम्ब्रियो (भ्रूण) और चिप बनाने की कार्यशाला यहां रखी गई है, उससे निश्चित रूप से बढ़ावा मिलेगा। मध्य प्रदेश में इसे लागू करने के सवाल पर उन्होंने कहा, "हम सारे राज्य जो बेस्ट प्रैक्टिसेस हैं, उसको अडॉप्ट करते हैं। सीएम कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री के सामने हम समझते हैं कि किस राज्य में कौन सा बेहतर काम हो रहा है। आज मेरा आने का उद्देश्य यही था कि मध्य प्रदेश के रीवा में हम लोगों ने भी गोवंश वन्यविहार बनाए हैं जहां 10 हजार गायें हैं और 20 हजार गायों का हम बना रहे हैं। वहां संरक्षण-संवर्धन हो रहा है, अब नस्ल सुधार भी होगा।"

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा, "दुनिया का यह पहला कार्यक्रम है। बरेली में पहली बार भ्रूण प्रत्यारोपित करने का कार्यक्रम किया जा रहा है। यहां ब्राजील के मेहमान आए हैं, तंजानिया के मेहमान आए हैं और यहां घनश्याम के माध्यम से उनके इस स्थान पर शोध किया जाएगा। भ्रूण स्थानांतरण से देसी गाय में नस्ल सुधार होगी। देसी गाय का दूध अमृत है। यदि किसी भी परिवार को एक लीटर भी देसी गाय का दूध मिल जाए, तो अमृत मिल गया।"

उन्होंने कहा कि अब तक लोग देसी गाय को छोड़ देते थे, लेकिन नस्ल सुधार से किसान की आय बढ़ेगी और हर उपभोक्ता को शुद्ध देसी गाय का दूध मिलेगा। राहुल गांधी के 80 प्रतिशत नॉन-वेज वाले बयान पर उन्होंने कहा, "यह व्यक्ति की व्यक्तिगत आदत है, किसी को शाकाहारी पसंद है, किसी को नॉन-वेज, उसमें मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी। जो शाकाहारी हैं, वही अच्छे लोग होते हैं।"

वन मंत्री अरुण सक्सेना ने कहा कि यह पहल किसानों और आम जनता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। "अगर गाय की नस्ल सुधरेगी, हमारा गाय का दूध बढ़ेगा, तो जो गाय दो-चार किलो दूध देती है, वो 12-14 किलो दूध देगी, तो किसानों की आय बढ़ेगी।" उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस आधुनिक तकनीक को छोटे और सामान्य किसानों तक पहुंचाने के लिए योजना बनाएगी।

लीड्स जेनेटिक्स के निदेशक आशीष खंडेलवाल ने बताया कि इस परियोजना की प्रेरणा 2022 में कोविड के बाद उनकी माता की इच्छा से मिली। उन्होंने कहा, "सरकार 12 साल से ब्राजील से एम्ब्रियो लाने का प्रयास कर रही थी, हमने प्रयास किया और इसे सफलतापूर्वक हासिल कर लिया।"

उन्होंने बताया कि अब तक इस परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं और आने वाले पांच साल में 1500 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है। किसानों को फायदा समझाते हुए उन्होंने कहा, "अभी 4-5 लीटर दूध देने वाली गाय को अगर 40 लीटर तक ले जाते हैं और 60 रुपए लीटर मानें तो किसान की रोजाना आमदनी 240 रुपए से बढ़कर 2400 रुपए हो जाएगी। आज गाय पर 300-400 रुपए खर्च आता है और 240 रुपए ही मिलते हैं, इसलिए किसान उसे सड़क पर छोड़ देता है। हमारा प्रयास है कि गायें सड़क पर न आएं।"

बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने कहा, "जब हम प्रधानमंत्री और सीएम योगी की बात करते हैं तो हर आदमी चाहता है कि किसान सशक्त हो। किसान बढ़ेगा तो देश बढ़ेगा। हमने रिसर्च की कि एक समय स्वर्णिम काल था और दूध की नदियां बहती थीं, इसकी बड़ी वजह गाय थी। हमारा किसान गुलामी में रहा, इसलिए गाय की सेवा नहीं कर पाया और नस्ल खराब होती गई।"

उन्होंने कहा कि अगर 50 किलो, 40 किलो या कम से कम 20 किलो तक दूध देने वाली गायें होने लगे, तो किसान की स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

--आईएएनएस

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