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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली में बढ़ सकता है जाम, कई रास्ते डायवर्ट

ब्रिक्स

नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। भारत 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कई मार्गों पर अस्थायी ट्रैफिक प्रतिबंध और जाम की स्थिति देखने को मिल सकती है। हालांकि, इन व्यवधानों को केवल ट्रैफिक की परेशानी के तौर पर नहीं, बल्कि इतने बड़े वैश्विक आयोजन की सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है।

इस बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 11 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के साथ 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडल तथा अन्य आमंत्रित विदेशी मेहमान भी हिस्सा ले रहे हैं। इतने बड़े स्तर पर होने वाले आयोजन में हर नेता की राजधानी में केवल एक बार आवाजाही नहीं होती, बल्कि दिनभर में कई उच्च सुरक्षा वाले दौरे तय होते हैं।

एक सामान्य कार्यक्रम के तहत किसी विदेशी नेता की एयरपोर्ट से होटल, होटल से भारत मंडपम स्थित सम्मेलन स्थल, द्विपक्षीय बैठकों, आधिकारिक कार्यक्रमों और अन्य कूटनीतिक आयोजनों तक दो से तीन बार आवाजाही हो सकती है। ऐसे में अलग-अलग नेताओं की आवाजाही को मिलाकर एक ही दिन में करीब 70 से 80 या उससे अधिक हाई-सिक्योरिटी वीवीआईपी मूवमेंट हो सकते हैं।

इन सभी मूवमेंट के लिए अलग-अलग सुरक्षा घेरा, ट्रैफिक नियंत्रण, मार्गों पर अस्थायी प्रतिबंध और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि आम दिनों की तुलना में ट्रैफिक पर इसका असर अधिक दिखाई देता है।

यह आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे में भारत, मेजबान देश होने के नाते, सभी विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अस्थायी ट्रैफिक प्रतिबंध केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। दुनिया की प्रमुख राजधानियों में जब भी बड़े अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित होते हैं, तब सुरक्षित कॉरिडोर, सीमित यातायात और विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाते हैं।

भारत की बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक भूमिका को देखते हुए आने वाले वर्षों में देश वैश्विक शिखर सम्मेलनों, रणनीतिक संवादों और उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठकों का प्रमुख केंद्र बनता जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली की भूमिका भी वैश्विक कूटनीति की महत्वपूर्ण राजधानियों में और मजबूत होने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

डीएससी