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बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटका रही सरकार, जनता को चाहिए रोजगार और शिक्षा: यासूब अब्बास

सरकार के फैसलों पर यासूब अब्बास की प्रतिक्रिया
बुनियादी

लखनऊ, 14 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों को बंद करने के फैसले, 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की योजना और भारत की महिला क्रिकेट टीम से जुड़े ट्रॉफी विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मदरसों को बंद किए जाने का विरोध करते हुए शिक्षा के अधिकार का सवाल उठाया। वहीं, यूसीसी को लेकर उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विषयों को सामने लाया जा रहा है। महिला एशिया कप में ट्रॉफी नहीं लेने के मामले पर उन्होंने भारतीय टीम के रुख का समर्थन करते हुए पाकिस्तान के साथ पूरी तरह क्रिकेट संबंध खत्म करने की वकालत की।

पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों को बंद करने के फैसले पर मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि किसी भी शिक्षा संस्थान को बंद करने से पहले यह देखना चाहिए कि वहां कितने छात्र पढ़ रहे हैं और संस्था बंद होने से उनकी पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा। यदि कोई संस्था कानून के दायरे में रहकर निजी तौर पर शिक्षा प्रदान कर रही है और वहां कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं हो रही है, तो उसे केवल मान्यता का मुद्दा उठाकर बंद नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मदरसों के जिम्मेदार लोगों को अदालत का रुख करने की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें न्यायिक राहत मिलने की उम्मीद है।

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि एक तरफ देश में शिक्षा को बढ़ावा देने की बात हो रही है, जबकि दूसरी तरफ सैकड़ों मदरसों को बंद करने से बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। यह शिक्षा के विस्तार की नीति के अनुरूप नहीं है।

मदरसों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि देशभर में हजारों मदरसे संचालित हो रहे हैं और किसी एक व्यक्ति की गलत गतिविधि के आधार पर पूरे शिक्षा संस्थान को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई व्यक्ति किसी संस्थान से पढ़ाई करने के बाद गलत गतिविधि में शामिल होता है, तो उसके लिए सीधे तौर पर उस शिक्षण संस्थान को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। इसी संदर्भ में उन्होंने हावर्ड यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी शिक्षण संस्थान के किसी छात्र की गतिविधि के आधार पर पूरे संस्थान को बदनाम करना उचित नहीं है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 21 भाजपा-शासित राज्यों में लोकसभा चुनाव से पहले यूसीसी लागू करने संबंधी बयान पर मौलाना यासूब अब्बास ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यूसीसी को लेकर इस तरह की घोषणाओं से केवल एक समुदाय ही नहीं, बल्कि देश के कुछ अन्य क्षेत्रों के लोग भी असहमत हैं। छात्रों की ओर से रोजगार की मांग, पेपर लीक, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे मुद्दे लगातार सामने हैं। इन समस्याओं का समाधान यूसीसी जैसे मुद्दों के जरिए नहीं किया जा सकता।

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि पिछले कई वर्षों से तीन तलाक, यूसीसी, एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों पर राजनीति होती रही है, लेकिन अब जनता रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे बुनियादी सवालों पर जवाब चाहती है। जनता अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है।

महिला एशिया कप फाइनल में श्रीलंका को हराकर भारतीय टीम के चैंपियन बनने और पाकिस्तानी एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार करने के विवाद पर भी मौलाना यासूब अब्बास ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों को लेकर गंभीर मतभेद हैं, तो क्रिकेट संबंधों पर भी स्पष्ट नीति होनी चाहिए। अगर दोनों देशों के बीच मुकाबले जारी रहते हैं और केवल ट्रॉफी लेने के मामले में अलग रुख अपनाया जाता है, तो यह स्थिति विरोधाभासी लगती है।

मौलाना यासूब अब्बास ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंधों पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों के बीच संबंध इतने खराब हैं कि पाकिस्तानी अधिकारी के हाथों ट्रॉफी लेना स्वीकार नहीं किया जा रहा, तो फिर भारत को पाकिस्तान के साथ मैच भी नहीं खेलना चाहिए। भारतीय महिला टीम ने जिस तरह अपना रुख स्पष्ट किया, वह पुरुष टीम के लिए भी एक संदेश है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पुरुष टीम पहले इसी तरह ट्रॉफी नहीं लेने का फैसला कर चुकी है। पाकिस्तान के साथ क्रिकेट समेत अन्य संबंधों के पूर्ण बहिष्कार की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की नीति स्पष्ट और एकरूप होनी चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके