पटना, 3 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में जीत दर्ज करते हुए भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 मतों से पराजित कर दिया। इस जीत के साथ प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं, जबकि भाजपा को इस प्रतिष्ठित सीट पर बड़ा झटका लगा है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी परिणाम के अनुसार, प्रशांत किशोर को 64,151 मत मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 वोट प्राप्त हुए। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता 14,273 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा पहुंचे नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई थी।
वर्ष 1995 से यह सीट भाजपा का अभेद्य किला मानी जाती रही है। 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन पहली बार विधायक बने और 2025 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे। इसके पहले तीन बार उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। ऐसे में इस सीट पर भाजपा की हार को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशांत किशोर पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक को भेदकर बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम जन सुराज पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। उधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जनादेश को स्वीकार करते हुए हार की समीक्षा करने की बात कही है।
बता दें कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह भाजपा का पहला विधानसभा उपचुनाव था और पार्टी को इसमें हार का सामना करना पड़ा है, जिससे संगठन और चुनावी रणनीति पर नए सिरे से मंथन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस उपचुनाव में भाजपा को उम्मीदवार चयन को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा।
पार्टी ने पहले अभिषेक सिन्हा 'बंटी' को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनके चुनाव लड़ने में असमर्थता जताने के बाद अंतिम समय में नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा गया। पिछले विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, लेकिन बांकीपुर उपचुनाव में मिली यह जीत पार्टी के लिए राजनीतिक संबल मानी जा रही है।
वहीं, विधानसभा में प्रशांत किशोर की मौजूदगी सरकार के लिए विपक्ष की आवाज को और मुखर बना सकती है। दूसरी ओर, भाजपा के लिए यह परिणाम संगठनात्मक मजबूती और उम्मीदवार चयन की रणनीति पर पुनर्विचार का संकेत माना जा रहा है।