Industrial Growth Bihar: देश के लिए अब तक का सबसे निराशाजनक बजट, बिहार को नहीं मिला उसका हिस्सा: राजेश राम

राजेश राम ने बजट 2026-27 को बिहार और आम जनता के लिए निराशाजनक करार दिया
देश के लिए अब तक का सबसे निराशाजनक बजट, बिहार को नहीं मिला उसका हिस्सा: राजेश राम

पटना:  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लोकसभा में रविवार को पेश बजट को बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम ने देश के लिए अब तक का यह सबसे निराशाजनक बजट बताया है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों की चमक में उलझाकर सपने बेचने वाली मोदी सरकार ने इस बजट में जमीन पर देश की बिखरती अर्थव्यवस्था को छिपाने का काम किया है।

राजेश राम ने कहा कि बजट के बाद धराशायी होता शेयर बाजार बताने के लिए काफी है कि सरकार की नीतियों पर निवेशकों का अविश्वास है। बिहार को उसके हिस्से की राशि तक नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था का असंतुलन छिपाने की भरपूर कोशिश इस बजट के माध्यम से की गई है।

उन्‍होंने कहा कि बजट भाषण में विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कृषि, उद्योग और रोजगार जैसे मूल स्तंभों पर ठोस योजनाओं का अभाव साफ दिख रहा है। यह बजट संतुलन नहीं, बल्कि भ्रम पैदा कर केवल आंकड़ों में सुंदरता दिखाने की कोशिश है। महंगाई पर सरकार की चुप्पी का सीधा असर जनता पर पड़ रहा है। पेट्रोल, गैस, खाद्य पदार्थ—सब महंगे हो रहे हैं, लेकिन बजट में आम आदमी को राहत देने के बजाय उसे “सहनशील” बनने की सलाह वित्त मंत्री द्वारा दी गई।

राजेश राम ने कहा कि यह न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक असंवेदनशीलता भी है। बजट में सरकारी भर्ती का न ही ठोस कैलेंडर है और न ही निजी क्षेत्र में नौकरियों को लेकर कोई स्पष्ट योजना सरकार की दिखती है।

इधर, बिहार युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पिछले चुनाव में सुल्तानगंज विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे ललन कुमार ने कहा कि इस बजट से बिहार के लोगों को निराशा हुई है। बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए न विशेष पैकेज के लिए कोई प्रस्ताव किया गया और न प्रदेश में उद्योग लगाने को लेकर कोई बात कही गई। बिहार में पलायन रोकने के लिए भी इस बजट में कहीं कोई बात नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के बजट भाषण से एक तरह से बिहार गायब दिखा। पटना के लिए शिप मरम्मती के कारखाने के लिए जो घोषणा की गई है, वह 'आई वॉश' के अलावा कुछ नहीं है। कुल मिलाकर बजट में किसान, मजदूर, महिलाओं, युवाओं और बेरोजगारों का ध्यान नहीं रखा गया है। जिन योजनाओं की घोषणा की गई है, वे पुरानी हैं। महंगाई और बेरोजगारी कम करने की कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।

--आईएएनएस

 

 

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