गांधीनगर, 23 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात के कच्छ जिले की भुज तालुका का भुजोड़ी गांव पारंपरिक हैंडलूम आर्ट की वजह से देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुका है। भुजोड़ी की हथकरघा बुनाई की यह कला लगभग 500 साल पुरानी है, जिसमें कारीगर अपने हाथों से धागा कातने से लेकर हैंडलूम पर नई-नई डिजाइन के शॉल, साड़ी और दुपट्टे जैसे ड्रेस मटेरियल तैयार करते हैं।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह कला न केवल हस्तांतरित हो रही है, बल्कि प्रदर्शनी, मार्केटिंग और प्रमोशन जैसे राज्य सरकार के प्रोत्साहनों से लगातार आगे भी बढ़ रही है।
हथकरघा कारीगर विश्राम वालजी वनकर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि भुजोड़ी में बुनाई का यह काम काफी पहले से चल रहा है। हमारे वनकर भाई, जिन्हें मेघवाल भी कहते हैं, बुनाई का काम करते हैं और यह काम बाप-दादा के जमाने से चल रहा है।
हथकरघा कारीगर श्यामजीभाई वनकर ने बताया कि सरकार ने इस काम में हमारी बहुत मदद की है। गुजरात और भारत सरकार ने हमें डिजाइनिंग और मार्केंटिंग के लिए दिल्ली, मुंबई, और कोलकाता में एग्जिबिशन में बुलाया। इसमें हमारी बहुत मदद की। इसके अलावा प्रदर्शनियों के माध्यम से हमारे मार्केट का बहुत विस्तार हुआ।
वैसे तो भुजोड़ी में हैंडलूम से तैयार किए जाने वाले सभी उत्पाद बेहतरीन हैं, लेकिन यहां की कच्छी शॉल की बात ही कुछ अलग है। कच्ची ऊन, पश्मीना या काले कॉटन को नेचुरल कलर्स में रंगकर हथकरघा से तैयार की जाने वाली इस कच्छी शॉल को जीआई टैग भी मिल चुका है। भुजोड़ी में 350 से ज्यादा कारीगरों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से तैयार यहां के हैंडलूम उत्पाद अमेरिका, जापान, जर्मनी समेत 18 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बुनकर गाभूभाई वनकर ने बताया कि हमें 2010 में जीआई टैग मिला। बुनाई के हमारे पारंपरिक काम का कोई डुप्लीकेशन न हो सके, इसके लिए हमारी विशेष कच्छी शॉल को जीआई टैग मिला है।
हथकरघा कारीगर अर्जुनभाई वनकर ने बताया कि हमें बुनाई के काम में बहुत प्रोत्साहन मिला है। वर्तमान में, कारीगर काले कॉटन से साड़ियां, दुपट्टे, और स्टॉल जैसी नई-नई चीजें बना रहे हैं। इसके अलावा, देश और विदेश में सरकार के सहयोग से हथकरघा कारीगर सभी प्रदर्शनियों में जाते हैं और उन्हें रोजगार मिल रहा है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सरकार का खादी, कुटीर एवं ग्रामीण उद्योग विभाग न केवल भुजोड़ी के इस हैंडीक्राफ्ट को नई ऊंचाई दे रहा है, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को साकार करते हुए बुनकरों के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी फोकस कर रहा है।
गुजरात के खादी, कुटीर एवं ग्रामीण उद्योग मंत्री नरेशभाई पटेल गुजरात ने बताया कि मेरा विभाग इस दिशा में दिन-ब-दिन कड़ी मेहनत कर रहा है। आने वाले दिनों में उन्हें अधिक से अधिक रोजगार और कमाई के अवसर मिलें, इसके इंतजाम किए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले मैंने अहमदाबाद में एक शोरूम का उद्घाटन किया था। जब मैंने उसमें कुछ हैंडलूम आइटम देखे, तो मैं भी हैरान रह गया।
अपनी अनूठी हैंडलूम कला के लिए भुजोड़ी के बुनकर 50 से ज्यादा नेशनल और इंटरनेशन अवार्ड जीत चुके हैं। कच्छ में आयोजित रणोत्सव और देश-विदेश में हैंडलूम मेलों में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शिनी के अलावा ऑनलाइन बिक्री के बढ़ते विकल्पों की वजह से भुजोड़ी के हैंडलूम प्रोडक्ट्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है। यहां के बुनकर समुदाय का आत्मविश्वास और समृद्ध गुजरात के संकल्प को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान है।
--आईएएनएस
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