मुंबई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को कहा कि 'भाषा की राजनीति' से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में गैर-मराठी भाषी लोगों को भी समान महत्व दिया जाता है।
उनका बयान उस वक्त आया, जब राज्य सरकार ने सभी ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही, उन्हें यह भाषा सीखने के लिए एक साल की मोहलत भी दी गई है।
आईएएनएस से खास बातचीत में सरनाईक ने जोर दिया कि ड्राइवरों को यह भाषा प्यार से सिखाई जानी चाहिए, न कि हिंसा का इस्तेमाल करके। हिंसा, डराने-धमकाने या लाठियों के जरिए नतीजे पाने की कोशिश से सिर्फ गरीब लोग डरेंगे और दूर हो जाएंगे, साथ ही 98 प्रतिशत आबादी भी नाराज होगी। भाषा की राजनीति नहीं करनी चाहिए। हमें मराठी पहचान से प्यार करना चाहिए, उसका सम्मान करना चाहिए और उसे आगे बढ़ाना चाहिए। इस देश में किसी को भी जबरदस्ती लोगों पर कुछ थोपने का अधिकार नहीं है और हम ऐसे तरीकों का कड़ा विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि बोरीवली और दहिसर में 20,000 ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी भाषा सीखने के बाद सम्मानित किया गया और 12 सितंबर को 7,000 अन्य लोगों को सम्मानित करने के लिए एक और कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि अगर कोई मुझसे हिंदी में बात करता है, तो मैं भी उनसे उसी भाषा में बात करता हूं। हम ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए नियम बना सकते हैं। लेकिन हम किसी एक्टर, क्रिकेटर या आम राहगीर को मराठी में बात करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। हम उनसे ऐसा करने का सिर्फ अनुरोध कर सकते हैं।
मंत्री ने राज्य में सभी समुदायों को समान महत्व देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "मेरे अपने चुनाव क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत लोग हिंदी भाषी हैं। मेरा उनसे वैसा ही रिश्ता है, जैसा मराठी लोगों से है। मराठी नेता होने के बावजूद, हमने 'उत्तर भारतीय भवन' और यहां तक कि 'मैथिली समाज भवन' और 'राजस्थानी समाज भवन' भी बनवाए हैं।"
उन्होंने साफ किया कि मराठी में बात करने का मुद्दा सिर्फ भाषा के लिए नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और मराठी संस्कृति के लिए उठाया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मैं हिंदी-भाषी या मराठी-भाषी वोटों के लिए काम नहीं करता। मैं विकास का मुद्दा लेकर चुनाव क्षेत्र में जाता हूं।
उन्होंने जोर दिया कि महाराष्ट्र का वोट बैंक किसी एक पार्टी का नहीं है। मराठी वोटर सभी पार्टियों में बंटे हुए हैं। वे कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना, यूबीटी गुट, मनसे और आरपीआई के अलग-अलग गुटों में भी हैं।
सरनाईक ने मुंबई में हाल ही में हुए 'दही-हंडी' कार्यक्रम के एक वायरल वीडियो से जुड़े विवाद पर भी बात की।
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब मंत्री ने 'दही-हंडी' कार्यक्रम के दौरान अभिनेता संजय दत्त से मराठी में बात करने को कहा, जिस पर उन्होंने जवाब दिया, "मैंने यरवदा जेल में छह साल बिताए, फिर भी मैं मराठी नहीं सीख पाया।"
मंत्री ने बताया कि इस इवेंट में सुनील शेट्टी, संजय दत्त, सूर्यकुमार यादव और सिंगर बादशाह समेत कई मेहमान शामिल हुए। उन सभी ने मराठी में बात की। संजय दत्त ने मराठी में दर्शकों का अभिवादन किया। बाद में, उन्होंने मजाक में मुझसे कहा, 'प्रताप भाई, मैं बस इतनी ही मराठी बोल सकता हूं। मैंने जेल में कई साल बिताए लेकिन मराठी नहीं सीख पाया, फिर भी आज आपने मुझसे यह भाषा बुलवा ही ली।' यह गर्व की बात होनी चाहिए थी। लेकिन सिर्फ वह बात वायरल हुई जिसमें उन्होंने कहा कि जेल में रहने के बावजूद वह मराठी नहीं सीख पाए।
मंत्री ने दावा किया कि किसी ने भी सुनील शेट्टी की इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि मुंबई में रहने और काम करने के लिए मराठी सीखना जरूरी है क्योंकि यह एक सुंदर भाषा है। किसी ने सूर्यकुमार यादव के मराठी में बोलने या बादशाह के मराठी में गाना गाने पर ध्यान नहीं दिया। उन सकारात्मक पलों पर ध्यान देने के बजाय, सिर्फ संजय दत्त के जेल के समय और मेरे द्वारा उनसे मराठी बुलवाने वाली क्लिप को ही हाईलाइट किया गया।
--आईएएनएस
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