भोपाल, 8 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महान स्त्रोत हमारी वैदिक, पौराणिक और प्राचीन संस्कृति है। मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और निजी विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त तत्वावधान में कुशाभाऊ सभागार में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति पूजक है।
राज्यपाल ने कहा कि ब्रह्माण्ड के सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह, और नक्षत्र हमारी जीवन संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। प्रकृति के पांचों तत्व, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी, और नभ- हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल हैं। यह महान ज्ञान परंपरा अनंत काल से शाश्वत है। इसमें व्यावहारिकता, गहनता, और जीवन का गूढ़ दर्शन हैं। जरूरी है कि इस अद्भुत और गौरवशाली परंपरा को वर्तमान और भावी पीढ़ी तक सार्थक रूप से पहुंचाया जाए।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महान स्रोत हमारी वैदिक, पौराणिक और प्राचीन संस्कृति है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ, ज्ञान, विज्ञान और संस्कार के अद्भुत भंडार है। इन ग्रंथों के प्रत्येक पात्र प्रेम, आदर, त्याग, स्वाभिमान, सम्मान और नैतिकता के आदर्श प्रतीक है। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की है कि हमारी परंपरा और उसके ज्ञान तत्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी स्वीकारें। विद्यार्थियों को समाज के गरीब, पिछड़े, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएं। उन्हें विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्षम और सामर्थ्यवान बनाएं।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी गुरु शिष्य परंपरा में शिक्षा केवल पाठ याद करना नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन, आत्म निर्भरता और कर्तव्य बोध का विकास करना था। भारतीय ज्ञान परंपरा का गौरव, ऐसी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उस सोच में है, जिसने ज्ञान को मानव और समाज के हित से जोड़ा है। भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा की सार्थकता मनुष्य को अज्ञान, भय और बंधन से मुक्त करना और “सब सुखी हो” के लिए कार्य करना बताया है।
कार्यशाला में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि समाज जीवन में विद्यमान व्यावहारिक ज्ञान की समृद्ध परम्परा है। यह हमारे पूर्वजों का प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव उनकी वैज्ञानिक एवं समग्र जीवन-दृष्टि की परिचायक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में भारतीय ज्ञान परम्परा के समृद्ध समावेश का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है।
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