भारत के लिए हिंद महासागर में सेशेल्स बेहद खास सहयोगी : पूर्व मेजर जनरल संजय सोई

भारत के लिए हिंद महासागर में सेशेल्स बेहद खास सहयोगी : पूर्व मेजर जनरल संजय सोई

ग्रेटर नोएडा, 29 जून (आईएएनएस)। पूर्व मेजर जनरल संजय सोई ने भारत और सेशेल्स के बीच के रिश्ते की अहमियत को रेखांकित किया।

उन्होंने सोमवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अगर देखा जाए, तो सेशेल्स बहुत ही छोटा देश है। लेकिन, भारत के साथ इसका रिश्ता 50 साल से भी पुराना रहा है। इसकी लोकेशन पश्चिम हिंद महासागर में है। आज पूरी भू-राजनीति हिंद प्रशांत महासागर में हो रही है। अमेरिका से लेकर चीन तक के प्रभाव इस पर पड़ रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वो अपने रिश्ते हर देशों के साथ बनाकर रखे।

उनके मुताबिक, सेशेल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री वहां गए। ऐसे में पुरस्कार देना, निसंदेह सम्मान की बात है। यह बताता है कि भारत और सेशेल्स के बीच संबंध कैसे हैं। यह पुरस्कार भारत के प्रधानसेवक को दिया गया है। यह हम भारतीयों के लिए सम्मान की बात है। उनके राष्ट्रपति भी कुछ महीने पहले भारत आए थे। ऐसे में भारत ने उन्हें कुछ गिफ्ट दिए हैं, तो यह बेहद खास है। मौजूदा परिदृश्य में हमारे लिए यह जरूरी हो जाता है कि हम दुनिया के सभी देशों के साथ अपने रिश्ते प्रगाढ़ बनाकर रखें। खासकर सेशेल्स के साथ।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स में मिले सम्मान पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, यह कहा जा रहा है कि यह पुरस्कार पहली बार दिया गया है। अब तक हमारे प्रधानमंत्री को विभिन्न देशों ने 30 से ज्यादा सर्वोच्च अवॉर्ड दिए हैं।

वहीं, भाजपा नेता डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर का एक अहम देश है। प्रधानमंत्री ने खुद कहा है कि यह अवसरों का महासागर है। भारत और सेशेल्स के बीच रिश्तों को प्रगाढ़ करने के लिए बहुत अवसर हैं। दोनों के बीच बहुत समानता हैं। आगामी दिनों में अन्य देशों से संबंधों को प्रगाढ़ करने की दिशा में संस्कृति अहम भूमिका निभाएगी। अगर आप संस्कृति को हटा देते हैं, तो उसमें क्या बचता है।

उन्होंने कहा कि सात दशकों में कई ऐसे देश रहे, जहां हमारे देश का कोई भी प्रतिनिधि नहीं पहुंच पाया था। लेकिन, पिछले 10 सालों के शासनकाल में हमारे देश के प्रतिनिधि हर जगह पहुंचे हैं। मेरा मानना है कि जिस तरह से जी-7 जैसे देशों के समूह हैं, ठीक उसी तरह से आगामी दिनों में रामायण और महाभारत से प्रभावित देशों का भी समूह होगा।

--आईएएनएस

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