नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। भारत और बेल्जियम ने रक्षा उद्योग में सहयोग व सैन्य उत्पादों के सह-विकास और सह-उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया है। बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत के साथ औद्योगिक सहयोग की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुलाकात की।
इस दौरान ने संजय सेठ बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विनिर्माण क्षमता को साथ लाने का आह्वान किया। दोनों देशों की विभिन्न कंपनियों के बीच महत्वपूर्ण समझौते भी हुए।
भारत का मानना है कि दोनों देश साइबर सुरक्षा, एआई आधारित मानव रहित हवाई प्रणालियां व जटिल हथियार प्रणालियां पर मिलकर काम कर सकते हैं। दोनों मंत्रियों ने 3 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित भारत-बेल्जियम रक्षा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की गोलमेज बैठक व कारोबारी बैठकों में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में बेल्जियम के रक्षा उद्योग, भारतीय उद्योग परिसंघ और सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के प्रतिनिधि शामिल हुए। यहां बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा, सूचना सुरक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में मजबूत संवाद तंत्र विकसित हो रहे हैं। उनके मुताबिक, इन संस्थागत ढांचों ने भारत को यूरोपीय संघ के लिए एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
भारतीय उद्यमियों की गतिशीलता की सराहना करते हुए फ्रांकेन ने बदलते सुरक्षा माहौल में दोनों देशों की सेनाओं को संयुक्त प्रयासों के जरिए मजबूत करने की जरूरत बताई।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेशी क्षमता बढ़ा रहा है। भारत भरोसेमंद साझेदारियों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया जैसी पहलों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
संजय सेठ ने कहा कि भारत और बेल्जियम अपनी-अपनी ताकत का लाभ उठाते हुए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग कर सकते हैं। इनमें साइबर सुरक्षा, एआई आधारित मानव रहित हवाई प्रणालियां, पानी के भीतर काम करने वाले वाहन और जटिल हथियार प्रणालियां शामिल हैं।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि आईडीईएक्स और अदिति जैसे भारतीय नवाचार मंच रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप और एमएसएमई को जोड़ रहे हैं। इन मंचों के जरिए एआई, क्वांटम तकनीक, सैन्य संचार व ड्रोन रोधी प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में काम किया जा रहा है।
संजय सेठ ने बताया कि भारत का रक्षा औद्योगिक आधार अब रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, तेजी से बढ़ते निजी क्षेत्र और 16,000 से अधिक एमएसएमई को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू उद्योग आज एयरोस्पेस, नौसैनिक और थल प्रणालियों, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और मानव रहित प्रणालियों सहित कई क्षेत्रों में उन्नत क्षमताएं विकसित कर रहा है।
रक्षा उत्पादन विभाग की ओर से उठाए जा रहे कदमों के जरिए क्षमता निर्माण को तेज किया जा रहा है। आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत किया जा रहा है और तकनीक हस्तांतरण तथा सह-विकास को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को उदार बनाया है। इसके तहत स्वचालित मार्ग से 74 प्रतिशत तक और सरकारी मार्ग से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति है, जिससे विशिष्ट और अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने बताया कि नई अंतरिक्ष नीति में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। इसके अलावा तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में रक्षा औद्योगिक गलियारे विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं और साझेदारों को प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन तथा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध करा रहे हैं। महाराष्ट्र, असम और अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे गलियारों की योजना बनाई जा रही है।
बैठक के दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इनका उद्देश्य बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता को भारत के कौशल और बड़े विनिर्माण आधार के साथ जोड़ना है। बैठक में सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स और बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री के बीच समझौता हुआ। साथ लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (भारत), एक्सेल रोबोटिक्स एसएएस (फ्रांस) और एक्सेल रोबोटिक्स (बेल्जियम) समेत कई अन्य समझौते किए गए।
--आईएएनएस
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