पटना, 2 जुलाई (आईएएनएस)। राजद अध्यक्ष लालू यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मामले में नामजद आरोपी रहे जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे आरोपी अधिकारी को 'पुरस्कृत' किए जाने जैसा बताया है।
साथ ही उन्होंने जांच की धीमी गति और मामले में पारदर्शिता को लेकर भी सरकार तथा पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। रोहिणी आचार्य ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि जवईनिया गांव के गरीब विस्थापितों की लड़ाई लड़ने वाले और भोजपुर प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की बात करने वाले भरत तिवारी की कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ में हत्या के मामले में नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को नई जिम्मेदारी सौंपा जाना हैरान करने वाला फैसला है।
उन्होंने कहा कि यह कदम आरोपी अधिकारी को पुरस्कृत किए जाने के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इस फैसले से मृतक के परिजनों और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को बल मिलता है कि कथित फर्जी मुठभेड़ को सत्ता के शीर्ष स्तर, पुलिस के उच्चाधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की सहमति प्राप्त थी।
रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री, बिहार सरकार और पुलिस महानिदेशक से कई सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में लगभग आधा दर्जन पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
उन्होंने यह भी पूछा कि आरोपियों से अब तक पूछताछ क्यों नहीं की गई और मामले की जांच इतनी धीमी गति से तथा बिना पारदर्शिता के क्यों आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि कहीं जांच में देरी और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने के पीछे किसी बड़े नाम को बचाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है।
रोहिणी आचार्या ने अपने पोस्ट में भरत तिवारी के मोबाइल फोन का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि घटना को लगभग एक पखवाड़ा बीत जाने के बावजूद पुलिस ने अब तक मृतक का मोबाइल फोन परिजनों को नहीं सौंपा है, जबकि इस संबंध में पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं।