नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव द्वारा राम मंदिर चढ़ावा और संतों से जुड़े कथित नाटक को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने इसे सनातन परंपरा, संत समाज और भगवान रामलला का अपमान बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर समाजवादी पार्टी ने इसे अनावश्यक करार दिया है।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि संसद परिसर के भीतर जो कुछ हुआ, वह नियमों और संसदीय मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नियम 222, 223 और 227 के तहत नोटिस दिया है। उनके अनुसार संसद परिसर के एकमात्र संरक्षक स्पीकर हैं और किसी को भी वहां संसदीय नियमों का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है। इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
संजय जायसवाल ने यह भी कहा कि उनके अनुसार इस घटना से संविधान के अनुच्छेद 25 की भावना का भी उल्लंघन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 जुलाई को संसद परिसर में मकर द्वार के सामने पप्पू यादव द्वारा किया गया प्रदर्शन सनातन धर्म का अपमान था और इसके लिए वह पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने इसे सदन की अवमानना और विशेषाधिकार हनन का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग दोहराई।
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने भी पप्पू यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संतों-साधुओं, भगवान रामलला और पवित्र भगवा परंपरा का अपमान कर उन्होंने गंभीर अपराध किया है। उनके अनुसार धार्मिक आस्था और संत समाज का सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
वहीं भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि पप्पू यादव ने संत का अभिनय कर हिंदू संतों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि वह अभिनय करना चाहते हैं तो अन्य धार्मिक वेशभूषा में भी ऐसा करने का साहस दिखाएं।
राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि यह हिंदू समाज की सहिष्णुता का गलत फायदा उठाने की कोशिश है और इस तरह की घटनाओं की कड़ी निंदा होनी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून नहीं होने चाहिए।
इसी बीच भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले सात-आठ वर्षों से आयोग में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, जिसके कारण झारखंड के युवाओं को नौकरी नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं, लेकिन कोई संज्ञान लेने को तैयार नहीं है। दूबे ने आरोप लगाया कि आयोग के सदस्य कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े हुए हैं।