बेंगलुरु, 15 जुलाई (आईएएनएस)। बेंगलुरु के मारियप्पनपाल्या इलाके के एक स्कूल में आठवीं कक्षा का एक छात्र अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। आरोप है कि स्कूल स्टाफ द्वारा शारीरिक सजा और भेदभाव किए जाने के बाद उसने आत्महत्या की कोशिश की।
मंगलवार को सामने आई इस घटना से छात्र के परिवार में भारी आक्रोश है। उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ज्ञानभारती पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच चल रही है।
माता-पिता के अनुसार, 'राइट टू एजुकेशन' (आरटीई) कोटे के तहत पढ़ने वाले इस लड़के का स्कूल में अपने दो सहपाठियों के साथ झगड़ा हुआ था। बताया जा रहा है कि मामला हेडमास्टर तक पहुंचा, जिसके बाद शिक्षकों ने कथित तौर पर छात्र की पिटाई कर दी।
परिवार का आरोप है कि लड़के के शरीर पर चोट के निशान पड़ गए थे और उसे दिन भर स्कूल परिसर में घुसने नहीं दिया गया। उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट पर यह आरोप भी लगाया है कि आरटीई कोटे के तहत एडमिशन होने की वजह से उसके साथ भेदभाव किया गया।
कथित अपमान और शारीरिक हमले को बर्दाश्त न कर पाने के कारण छात्र बहुत परेशान हालत में घर लौटा। उसके पिता किराने की दुकान पर काम करते हैं, जबकि उसकी मां एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करती है।
घटना के समय घर पर कोई नहीं था, इसलिए लड़के ने कथित तौर पर अपनी चचेरी बहन को घटना के बारे में बताया और फिर छत के पंखे से लटककर आत्महत्या करने की कोशिश की।
कुछ गड़बड़ महसूस होने पर चचेरी बहन ने उसे देखा और पाया कि वह संघर्ष कर रहा था। उसने तुरंत उसे बचाया और परिवार के सदस्यों को सूचित किया।
छात्र को नयांडाहल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर उसकी गंभीर चोटों का इलाज कर रहे हैं, जिसमें रीढ़ की हड्डी में आई चोट भी शामिल है।
परेशान माता-पिता ने अधिकारियों से तुरंत दखल देने और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। स्कूल प्रशासन पर शारीरिक दंड और भेदभाव के आरोपों की पुष्टि के लिए आगे की जांच चल रही है।
स्कूल ने अभी तक इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
--आईएएनएस
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