कोलकाता, 21 जुलाई (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव और लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को पार्टी के बागी विधायक मदन मित्रा को कानूनी नोटिस भेजा। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए डायमंड हार्बर के सांसद के खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत, दुर्भावनापूर्ण और मानहानि करने वाले बयान फैलाए।
अभिषेक के वकील श्रोबाना सेनगुप्ता ने मित्रा को भेजे कानूनी नोटिस में कहा कि बागी विधायक से डायमंड हार्बर के सांसद की 'व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, राजनीतिक कद, विश्वसनीयता और साख' को हुए नुकसान के लिए 10 करोड़ रुपए का मुआवजा देने को कहा गया है।
कानूनी नोटिस में कहा गया, "यह स्पष्ट किया जाता है कि उक्त 10 करोड़ रुपए एक रजिस्टर्ड ट्रस्ट में जमा किए जाएंगे। यह ट्रस्ट एआईटीसी के उन सांसदों और विधायकों के खिलाफ दल-बदल की कार्यवाही में मदद करेगा जिन्होंने पार्टी छोड़ी है। साथ ही, यह उन लोगों की कानूनी और पुनर्वास संबंधी जरूरतों को भी पूरा करेगा जो भारतीय जनता पार्टी के कहने पर और लोकसभा व पश्चिम बंगाल विधानसभा के कुछ बागी सदस्यों की मिलीभगत से दर्ज कराए गए झूठे आपराधिक मामलों के कारण राजनीतिक हिंसा का शिकार हुए हैं।"
मित्रा से तीन दिनों के भीतर मुआवजे की रकम का भुगतान करने को कहा गया। इसके अलावा, उन्हें 19 जुलाई, 2026 को अपने लाइव वीडियो के दौरान अभिषेक के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणियों के लिए लिखित और वीडियो दोनों रूपों में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का निर्देश दिया गया।
नोटिस में आगे कहा गया, "मेरे मुवक्किल कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकारों और उपायों को सुरक्षित रखते हैं। इसमें लिखी किसी भी बात को ऐसे अधिकारों को छोड़ने के तौर पर नहीं समझा जाएगा; वे सभी अधिकार स्पष्ट रूप से सुरक्षित रखे गए हैं। आपको इस नोटिस का जवाब देने और इसके निर्देशों के अनुसार तीन दिनों (72 घंटों) के भीतर कार्रवाई करने के लिए कहा जाता है। यह नोटिस आपको ईमेल (उन पतों पर जिनका इस्तेमाल आपने अपने वेरिफाइड फेसबुक प्रोफाइल के लिए और 2026 के चुनावों के दौरान किया था, जैसा कि भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष जमा किए गए आपके 'फॉर्म 26' हलफनामे में बताया गया है) और इंडिया पोस्ट के स्पीड पोस्ट के जरिए भेजा गया है।"