नई दिल्ली, 2 सितंबर (आईएएनएस)। जयपुर की सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में बैंक अधिकारी को 7 साल की सख्त सजा सुनाई है। साथ ही, कोर्ट ने 4.30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। सीबीआई ने बुधवार को यह जानकारी दी।
दोषी बैंक अधिकारी मुरारी लाल मीणा राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट स्थित ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट थे। सीबीआई ने 20 दिसंबर 2017 को बैंक की लालसोट ब्रांच की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी मुरारी लाल मीणा ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने बिना अधिकार के गलत तरीके से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जारी किए, जिससे लोन की बकाया राशि होने के बावजूद गिरवी रखी गई सिक्योरिटीज को रिलीज करने में मदद मिली। इस वजह से बैंक को 25 लोन अकाउंट्स में कुल 83,69,495 रुपए का नुकसान हुआ।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 28 अगस्त 2019 को आरोपी मुरारी लाल मीणा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और 23 जनवरी 2024 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए। ट्रायल के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया और उसी के अनुसार सजा सुनाई।
इससे पहले, चेन्नई स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 2008 के बैंक धोखाधड़ी मामले में एक स्टील ट्रेडिंग फर्म और छह लोगों को दोषी ठहराया। एक दोषी को दो साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई, जबकि बाकी पांच लोगों में से हर एक को छह महीने की कठोर कैद की सजा दी गई।
अदालत ने दोषी ठहराए गए छह लोगों पर कुल 60,000 रुपए का जुर्माना लगाया, जबकि फर्म को अलग से 20,000 रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया।
यह मामला यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के बाद 21 अप्रैल, 2008 को सीबीआई ने दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, फर्म और अन्य आरोपियों ने आपराधिक साजिश रची थी और धोखाधड़ी से बैंक से कई तरह की क्रेडिट सुविधाएं हासिल की थीं।
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