बागपत, 1 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के बागपत में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। मरीजों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए अस्पतालों में बेड आरक्षित करने के साथ जरूरी दवाइयों और जांच की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
सीएमसी डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि जिला चिकित्सालय में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए 12 बेड आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा, जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में छह-छह बेड आरक्षित कराए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वाइन फ्लू से संबंधित जरूरी दवाइयां और जांच किट उपलब्ध कराई गई हैं। फिलहाल अस्पताल में दवाइयों की कोई कमी नहीं है।
डॉक्टर ने बताया कि शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही दिखाई दे सकते हैं। मरीज को सर्दी, जुकाम, गले में खराश और बुखार जैसी परेशानी हो सकती है। ऐसे में कई बार लोग इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। खासतौर पर जब मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगे या गले की समस्या बढ़ जाए तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
डॉ. अनुराग ने बताया कि स्वाइन फ्लू सामान्य तौर पर जानलेवा नहीं होता, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह गंभीर हो सकता है। ऐसे मरीज जिन्हें पहले से कोई बीमारी है और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनमें संक्रमण के गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है। गुर्दे के रोगी, हृदय रोगी और डायबिटीज से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इन मरीजों में संक्रमण तेजी से गंभीर स्थिति में पहुंच सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को सर्दी-जुकाम, बुखार या सांस से जुड़ी परेशानी होने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
उनका कहना है कि स्वाइन फ्लू से जुड़े लक्षण दिखाई देने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है और जरूरत पड़ने पर उपचार भी तुरंत शुरू किया जा सकता है।
--आईएएनएस
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