मुंबई, 3 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम मंदिर चढ़ावा मामले और मुंबई में बारिश से हुई मौतों को लेकर भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुंबई अंडरवर्ल्ड की तरह अयोध्या भी अब 'भाजपा-शासित अंडरवर्ल्ड' बन गई है और राम मंदिर में डकैती हुई है।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा कि अयोध्या में सामने आ रही घटनाएं पूरे देश के लिए शर्मनाक हैं। राम मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपए की कथित चोरी हुई है और इस मामले में भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। अयोध्या में भय और दबाव का माहौल बना दिया गया है, जिसके कारण वहां के हालात से परिचित लोग भी खुलकर बोलने से डर रहे हैं। वह स्वयं अयोध्या जाएंगे और बताएंगे कि वहां "असल अंडरवर्ल्ड कौन चला रहा है।"
राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच को लेकर संजय राउत ने कहा कि इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए लेकिन क्या सुप्रीम कोर्ट निष्पक्ष है? क्या सुप्रीम कोर्ट भी उनके इशारे पर काम कर रहा है। देश की न्याय व्यवस्था में अब बहुत कम लोग बचे हैं जो चाहते हैं कि सब कुछ साफ-सुथरा हो।"
मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बीच दो लोगों की मौत पर भी संजय राउत ने भाजपा सरकार और नगर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि एक 11 वर्षीय स्कूली छात्र और एक बुजुर्ग की मौत केवल हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है।
उन्होंने भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम पर ऐसी दुखद घटनाओं के बीच हंसने का आरोप लगाते हुए इसे अमानवीय और असंवेदनशील व्यवहार बताया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जल्द से जल्द अमित साटम को उनके पद से हटा दें क्योंकि उनका व्यवहार सही नहीं है और जल्द से जल्द लोगों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएं।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि नालियों की समय पर सफाई नहीं होने और पेड़ों से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई न किए जाने के कारण यह स्थिति देखी जा रही है।
भाजपा के 104 प्रतिशत नालों की सफाई के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके बावजूद मुंबई जलमग्न है, लोग बह रहे हैं, वाहन पानी में फंसे हैं और कई इलाकों में घरों में पानी भर गया है। नगर आयुक्त को हटाने के बजाय शहरी विकास मंत्री की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और भाजपा नेताओं को बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दों के बजाय मुंबई की बुनियादी नागरिक सुविधाओं, जल निकासी, स्वास्थ्य सेवाओं और सड़कों पर ध्यान देना चाहिए।