अनंत खजूरिया ने उमर अब्दुल्ला के आरोपों को बताया निराधार, कहा- जनता को गुमराह करने की कोशिश

अनंत खजूरिया ने उमर अब्दुल्ला के आरोपों को बताया निराधार, कहा- जनता को गुमराह करने की कोशिश

कठुआ, 14 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जनरल सेक्रेटरी अनंत खजूरिया ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को भाजपा द्वारा प्रलोभन दिए जाने के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को गैर-जिम्मेदाराना और बेबुनियाद बताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती।

अनंत खजूरिया ने कहा कि उमर अब्दुल्ला द्वारा लगाया गया आरोप पूरी तरह निराधार है। जनता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ा जनादेश दिया था ताकि वह लोगों के मुद्दों पर काम करे, जनसेवा करे और जनता के हितों को प्राथमिकता दे। लेकिन जब सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में असफल होने लगी तो मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा पर बेबुनियाद आरोप लगाए जाने लगे।

भाजयुमो नेता ने कहा कि भाजपा ने उमर अब्दुल्ला के बयान को गंभीरता से लिया है और इसी मामले में उन्हें कानूनी नोटिस भेजा गया है। नोटिस के माध्यम से सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप न केवल भाजपा के खिलाफ हैं, बल्कि उन लोगों के लिए भी निराशाजनक हैं जिन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस और उमर अब्दुल्ला पर भरोसा जताया है।

जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर भी अनंत खजूरिया ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस मिलेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही इस संबंध में आश्वासन दे चुके हैं।

उन्होंने कहा, "जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने आश्वासन दिया है तो फिर देरी किस बात की है? उन्हें काम करने से कौन रोक रहा है? उनके पास सभी विभाग हैं और काम करने के लिए पर्याप्त अधिकार हैं।"

खजूरिया ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर आरोप लगाया कि जब सरकार की कथित विफलताओं, नौकरियों और अन्य मुद्दों को लेकर सवाल उठते हैं तो पार्टी स्टेटहुड के मुद्दे को उठने लगती है। जब सरकार की नाकामियां जनता के सामने आने लगीं तो स्टेटहुड की मांग को लेकर एक नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा किया गया।

उन्होंने कहा, "स्टेटहुड मिलने के बाद ऐसा क्या बदल जाएगा? प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि उचित समय और परिस्थितियों के अनुसार राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। जैसे ही सुरक्षा एजेंसियों से उचित मंजूरी मिलेगी और परिस्थितियां अनुकूल होंगी, स्टेटहुड वापस मिल जाएगा।"

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विकास कार्य स्टेटहुड नहीं होने की वजह से प्रभावित नहीं हो रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में हिंसा, पत्थरबाजी या अलगाववाद जैसी घटनाएं दोबारा न हों। खजूरिया ने कहा कि जब सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत होगी और ऐसी परिस्थितियां बनेंगी कि शांति और स्थिरता बनी रहे, तब राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा।

वहीं, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील कुमार शर्मा द्वारा सचिवालय घेराव के ऐलान पर भी अनंत खजूरिया ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा 20 जुलाई को सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करेगी। भाजपा का प्रदर्शन जनता के मुद्दों को लेकर होगा और इसमें लोगों की भागीदारी ही बताएगी कि जनता का समर्थन किसके साथ है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस प्रदर्शन में ज्यादा जनसमर्थन देखने को मिलता है।

--आईएएनएस

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