नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। इसे विपक्ष के सांसदों ने गुमराह करने वाली बैठक बताया है। सांसदों ने कहा कि जनता परेशान है लेकिन केंद्र सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते कहा कि देश में हालात लगातार खराब हो रहे हैं और महंगाई का बोझ आम जनता पर बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना जनता की राय लिए फैसले ले रही है जबकि उनके नतीजे जनता को भुगतने पड़ते हैं। विपक्ष केवल इन फैसलों के परिणामों को जनता तक पहुंचाने में रुचि रखता है।
पश्चिम एशिया संघर्ष पर सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के संदर्भ में पंजाब कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंभीर हैं, तो उन्हें इस बैठक में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि पीएम बैठक में नहीं आते तो इसका कोई वास्तविक महत्व नहीं रह जाएगा। सरकार को अपनी विदेश नीति और कार्ययोजना स्पष्ट रूप से पेश करनी चाहिए।
कांग्रेस नेता अमीन पटेल ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और हमलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा स्पष्ट रही है और शांति की पहल अक्सर भारत की ओर से ही होती रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सरकार के ईरान मुद्दे पर अपनाए गए रवैये और उससे जुड़े एलपीजी संकट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ दशकों पुराने संबंधों को ध्यान में रखते हुए सरकार का रवैया इस संकट की वजह बना है।
डिंपल यादव ने कहा कि वे सर्वदलीय बैठक में जाकर सरकार का पक्ष जानेंगे। इसके अलावा उन्होंने महिला आरक्षण बिल पर भी जोर दिया और कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार स्पष्ट रूप से बताए कि वह इसे कैसे लागू करना चाहती है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) सांसद महुआ माजी ने महिला आरक्षण बिल पर कहा कि कई राज्यों में चुनाव होने के कारण इसे बाद में सर्वदलीय बैठक में लाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण का लाभ अधिकतम महिलाओं तक पहुंचे, इसके लिए सभी पक्षों की सहमति से प्रावधान तय किए जाएं।
--आईएएनएस
