अगरतला, 31 अगस्त (आईएएनएस)। त्रिपुरा विधानसभा में राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग की मौत के मुद्दे पर सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जोरदार हंगामा हुआ। डीजीपी अनुराग का शव 20 जुलाई को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में उनके सरकारी कार्यालय से जुड़े वॉशरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि डीजीपी की पत्नी रविवार को त्रिपुरा पहुंचीं और यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उनके पति कोई सुसाइड नोट छोड़ गए थे।
इसके बाद कांग्रेस और माकपा (सीपीआईएम) के अन्य विधायक भी विरोध में शामिल हो गए और सरकार से इस मामले पर विस्तृत बयान देने की मांग करने लगे।
स्पीकर रामपद जमातिया ने कई बार विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।
विरोध के दौरान सुदीप रॉय बर्मन और नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस और माकपा विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
विपक्षी विधायकों ने मुख्यमंत्री माणिक साहा के इस्तीफे की मांग करते हुए तख्तियां और पोस्टर भी दिखाए।
स्पीकर ने बार-बार विपक्षी सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और प्रश्नकाल चलने देने का अनुरोध किया, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।
प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद भी कांग्रेस और माकपा के सदस्यों ने फिर से डीजीपी की मौत का मुद्दा उठाया, वेल में पहुंचकर नारेबाजी जारी रखी।
लगातार हंगामे के बीच स्पीकर ने सुदीप रॉय बर्मन को पूरे दिन के लिए सदन से निलंबित कर दिया। साथ ही मार्शल और वॉच एंड वार्ड कर्मियों को उन्हें सदन से बाहर ले जाने का निर्देश दिया।
स्पीकर ने कहा कि त्रिपुरा विधानसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 330 के तहत सुदीप रॉय बर्मन को निलंबित किया गया है।
इसके बाद कुछ मिनट तक और नारेबाजी करने के बाद पूरा विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया।
इससे पहले स्पीकर ने कहा कि मुख्यमंत्री माणिक साहा मानसून सत्र के पहले और दूसरे दिन डीजीपी की मौत के मामले में सदन में बयान दे चुके हैं।
हालांकि, सुदीप रॉय बर्मन और नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार डीजीपी की मौत से जुड़े तथ्यों को छिपा रही है।
सुदीप रॉय बर्मन ने यह भी दावा किया कि राज्य के पुलिस प्रमुख की मौत जैसे अहम मुद्दे को उठाने पर उन्हें गैरकानूनी तरीके से सदन से निलंबित किया गया।
मानसून सत्र के पिछले दो दिनों में भी डीजीपी अनुराग की मौत को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इसी तरह का हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली थी।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने पहले कहा था कि राज्य सरकार डीजीपी की मौत की सच्चाई सामने लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन दिए गए बयान में मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य पुलिस ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की मौत की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस जांच की निगरानी पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) मांचक इप्पर कर रहे हैं और जांच दल इस मामले में दिल्ली भी जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया था कि जांच टीम पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल सबूत, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री की जांच करेगी, ताकि डीजीपी की मौत की परिस्थितियों और कारणों का पता लगाया जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी की गैरकानूनी भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सभी लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की अटकलें लगाने से बचें।
--आईएएनएस
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