अमरावती, 4 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी के प्रदूषण को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट पर राजमहेंद्रवरम स्थित 'आंध्रा पेपर लिमिटेड' को लेकर तीखी पोस्ट की गई है। पोस्ट में कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि राजमहेंद्रवरम में गोदावरी नदी के प्रदूषण का आधा हिस्सा अकेले इसी कंपनी से आता है।
उपमुख्यमंत्री कार्यालय ने लिखा, "वे उत्पादन तो कर रहे हैं और साथ ही प्रदूषण भी फैला रहे हैं, लेकिन टैक्स देने से बच रहे हैं। आंध्रा पेपर मिल्स ने टैक्स न चुकाकर लगभग 12 साल का समय गुजार दिया है।"
सरकार का आरोप है कि कंपनी पर स्थानीय निकायों का 21.34 करोड़ रुपए का टैक्स बकाया है। 2016 से न तो कटेरू ग्राम पंचायत और न ही राजमहेंद्रवरम नगर निगम को कंपनी ने एक भी रुपया टैक्स के रूप में दिया है। जब भी टैक्स चुकाने के लिए नोटिस जारी किए जाते हैं, कंपनी कोर्ट का दरवाजा खटखटा कर देरी करती है और अपनी जिम्मेदारी से बचती रहती है।
पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि बिना किसी छूट के कंपनी ने खुद को टैक्स से कैसे अलग कर लिया?
प्रदूषण को लेकर आंकड़े भी बेहद चौंकाने वाले हैं। सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि जहां पूरा राजमहेंद्रवरम शहर लगभग 70 मिलियन लीटर तरल कचरा पैदा करता है, वहीं अकेली आंध्रा पेपर मिल 35 मिलियन लीटर कचरा रोजाना छोड़ती है। यानी शहर के कुल कचरे का 50 फीसदी हिस्सा सिर्फ एक कंपनी से आ रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में भी गंभीर गड़बड़ियां मिली हैं। कंपनी के लैगून से लिए गए सैंपल में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 36 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई, जो तय मानक से 20 फीसदी ज्यादा है। फॉस्फेट 5.3 मिलीग्राम यानी 6 फीसदी अधिक और सल्फाइड 3.4 मिलीग्राम यानी मानकों से 70 फीसदी ज्यादा पाया गया है।
पोस्ट में कहा गया कि इस प्रदूषण के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है, जिससे जलीय जीवों के जीवन पर संकट है। गोदावरी का प्राकृतिक इकोसिस्टम बिगड़ रहा है, बदबू फैल रही है, और सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच रहा है। भूजल को बचाने के लिए दिए गए सुझावों को भी कंपनी ने लागू नहीं किया।
सरकार ने चेतावनी दी है कि नियमों के उल्लंघन पर फैक्ट्री बंद करने, जुर्माना लगाने, कंपनी जब्त करने और लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। लेकिन सरकार ने उद्योग को परेशान न करने की मंशा से पहले कारण बताओ नोटिस देकर गलती सुधारने का मौका दिया। पिछले तीन महीनों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कंपनी प्रतिनिधियों से कई बार बातचीत की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कंपनी को समन जारी कर रहा है और सरकार ने एडवोकेट जनरल और सरकारी वकीलों को ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने 'स्वच्छ गोदावरी, पवित्र पुष्करम' अभियान के तहत पर्यावरणविदों और नागरिक समाज से भी सहयोग की अपील की है।
--आईएएनएस
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