अमरावती, 10 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने गुरुवार को शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे और डीएससी 2025 की सीबीआई जांच की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इसमें अभूतपूर्व 'अनियमितताएं' हैं और उन उम्मीदवारों को आसानी से नौकरियां दे दी गईं जिन्होंने परीक्षा भी नहीं दी थी।
ताडेपल्ली में वाईएसआरसीपी के सेंट्रल ऑफिस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, उन्होंने डीएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और मंत्री नारा लोकेश की चुप्पी पर सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि डीएससी 2025 के जरिए शिक्षकों की भर्ती में एक के बाद एक गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
जगन ने सरकार पर डीएससी घोटाले की जांच को जानबूझकर कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि चंद्रबाबू नायडू अपने बेटे को बचाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं और आरोप लगाया कि सरकार 'बेरोजगार युवाओं की जिंदगी और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।'
उन्होंने पूछा, "डीएससी परीक्षा के पेपर तैयार करने और उनकी देखरेख की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति को क्यों सौंपी गई, और सरकार ने जीओ नंबर 4 और जीओ नंबर 47 क्यों जारी किए? भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद जीओ क्यों बदले गए?"
वाईएस जगन जानना चाहते थे कि स्पोर्ट्स कोटे के तहत 372 पद बिना परीक्षा कराए कैसे भरे गए। "जीओ नंबर 4 और जीओ नंबर 47 ने गड़बड़ियों के लिए रास्ते खोल दिए, जबकि काम पूरा होने के बाद उन रास्तों को बंद करने के लिए बाद में जीओ नंबर 23, 25 और 56 लाए गए।"
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि कैसे सभी नियमों और सावधानियों को ताक पर रखकर नौकरियां दी गईं, और डीएससी घोटाला सामने आने के बाद गठबंधन सरकार ने एपीपीएससी परीक्षाओं को रोक दिया है, जिनके जरिए वे इसी तरीके से भर्ती करने की योजना बना रहे थे।
उन्होंने कहा, "उम्मीदवारों को उन टूर्नामेंट्स के पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरियां दी गईं जो कभी हुए ही नहीं थे।" डीएससी को चंद्रबाबू के घोटालों की सूची में एक बड़ा घोटाला बताते हुए जगन ने कहा, "हर गुजरते दिन के साथ डीएससी 2025 के मामले में कई चौंकाने वाले सच सामने आ रहे हैं।"
वाईएस जगन ने कहा कि सीएम नायडू अपने बेटे को बचाने के लिए इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, जबकि अधिकारियों के पास आरोपों का बचाव करने के लिए कोई जवाब नहीं है। उनका यह दावा कि नौकरी देने से पहले सात बार वेरिफिकेशन किया गया था, एक मजाक जैसा लगता है।
उन्होंने सीएम नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश पर मामले को दबाने के लिए 'विधानसभा को गुमराह करने' का आरोप लगाया।
हर मामले की डिटेल देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे स्पोर्ट्स कोटे के तहत बिना कोई परीक्षा लिए नौकरियां दी गईं। उनके अनुसार, "स्पोर्ट्स कोटे में 39 नौकरियां दी गईं; इनमें से कुछ लोगों ने ऐसे टूर्नामेंट में भाग लेने के सर्टिफिकेट दिए जो कभी खम्मम में हुआ ही नहीं था - इस बात की पुष्टि तेलंगाना जूडो एसोसिएशन ने साफ तौर पर की है। वहीं, नकली सर्टिफिकेट एपी जूडो एसोसिएशन ने दिए थे, जिसके प्रेसिडेंट लोकेश के साढू भाई भरत हैं। सॉफ्टबॉल में भी यही गड़बड़ी हुई और इसके हेड कूना रवि कुमार हैं।"
"योगेश्वर राव और उनकी बहन को स्पोर्ट्स कोटे के तहत 'फैमिली पैक' के तौर पर नौकरियां दी गईं। आधार यह था कि उन्होंने नलगोंडा में हुई खो-खो चैंपियनशिप में मेडल जीते थे, लेकिन विडंबना यह है कि ऐसी कोई प्रतियोगिता कभी हुई ही नहीं। तेलंगाना खो-खो एसोसिएशन ने साफ तौर पर यह बात कही है। बसवेश्वर राव ने दावा किया कि उन्होंने गुडीवाड़ा में हुई 49वीं सीनियर खो-खो चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और उन्हें पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट दिया गया था। भले ही वह एक नकली सर्टिफिकेट था, अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।"
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने बताया कि कुरनूल जिले के प्रभाकर को "टीईटी परीक्षा दिए बिना" नौकरी दे दी गई। उनके रिजर्वेशन कोटे के हिसाब से उन्हें 75 अंक मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें 65 अंक मिले और फिर भी नौकरी मिल गई। अधिकारियों ने इस मामले में अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कई बार परीक्षा दी थी और उनके सबसे ज्यादा अंक को माना गया लेकिन कैटेगरी में गड़बड़ी हो गई थी। कडपा जिले में रसूल के मामले में भी ऐसी ही गड़बड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि यह घोटाला तब शुरू हुआ जब प्रश्न बैंक तैयार करने और परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति को सौंप दी गई। गड़बड़ी तब सामने आई जब आउटसोर्सिंग पर रखे गए एक व्यक्ति को पेपर मिल गया, उसने पहली रैंक हासिल की और बाद में मेरिट लिस्ट से उसका नाम हटा दिया गया। हालांकि नौकरी देने के मामले में ऑडियो-वीडियो सबूत मौजूद थे लेकिन इस मामले में उस तरह से कार्रवाई नहीं की गई जैसी की जानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, "इस पूरी प्रक्रिया का उन युवाओं पर बुरा असर पड़ा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। सरकार की ऐसी लापरवाही से तो बस अव्यवस्था और गड़बड़ियां ही सामने आएंगी।"
--आईएएनएस
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