पुणे, 20 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) की नेता सुषमा अंधारे ने सोनम वांगचुक के विरोध-प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। बल प्रयोग करने के बजाय सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। साथ ही, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों पर उन्होंने जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
सुषमा अंधारे ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करने का संवैधानिक और मौलिक अधिकार प्राप्त है। सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को जिस प्रकार से रोकने और दबाने का प्रयास किया गया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इस कार्रवाई की आलोचना केवल देश में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। जिस आंदोलन का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता था, उसे प्रशासनिक बल के जरिए दबाने का प्रयास किया गया, जो सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सुषमा अंधारे ने कहा कि आंदोलन स्थल पर सफेद चादर ओढ़े पुलिसकर्मियों की मौजूदगी का दृश्य बेहद चिंताजनक था। उन्होंने इसे प्रतीकात्मक रूप से लोकतंत्र के लिए अपमानजनक बताते हुए कहा कि जिस प्रकार सफेद चादरों का इस्तेमाल किया गया, उससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो लोकतंत्र की ही अर्थी निकाली जा रही हो। संसद के बाहर की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए व्यापक बंदोबस्त किए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के शासन में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और देश में तानाशाही की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चंदा गड़बड़ी के आरोपों पर सुषमा अंधारे ने कहा कि भाजपा ने राम मंदिर निर्माण को बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में प्रस्तुत किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रमों के दौरान व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया और मंदिर निर्माण को राजनीतिक रूप से भी प्रचारित किया गया। अब यदि उसी ट्रस्ट को लेकर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह जांच कराए। यदि धार्मिक आस्था से जुड़े संस्थानों में भी कथित गड़बड़ियों के आरोप लगते हैं, तो इससे लोगों का विश्वास प्रभावित होता है।
अंधारे ने आरोप लगाया कि यदि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती है, तो जनता का शासन व्यवस्था और संस्थाओं पर भरोसा कमजोर होगा। सरकार को इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। जनता सरकार से जवाबदेही और ईमानदार प्रशासन की अपेक्षा रखती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार को आलोचनाओं का जवाब संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से देना चाहिए।