कोलकाता, 18 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और पश्चिम बंगाल पुलिस ने आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में पेशेवर प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और परिचालन दक्षता को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, आरआरयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) कल्पेश वांद्रा, आरआरयू की डीन (अकादमिक) डॉ. जसबीर कौर ठडानी और पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्ध नाथ गुप्ता की उपस्थिति में इस समझौते को औपचारिक रूप दिया गया। इस अवसर पर पुलिस विभाग और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस समझौते का उद्देश्य बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप पुलिसकर्मियों के कौशल उन्नयन (अपस्किलिंग) और पुनः कौशल विकास (रीस्किलिंग) के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, शैक्षणिक संसाधन और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर पेशेवर विकास और संस्थागत सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा खतरों की बदलती प्रकृति को देखते हुए क्षमता निर्माण के लिए एक सुव्यवस्थित और दूरदर्शी रणनीति अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से पुलिसकर्मियों को उन्नत शैक्षणिक संसाधनों, विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल और संस्थागत ढांचे का लाभ मिलेगा। साथ ही तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देकर कार्यकुशलता, जवाबदेही और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा।
आरआरयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) कल्पेश वांद्रा ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में विश्वविद्यालय पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा और आपराधिक न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि आरआरयू देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस इकाइयों के साथ सहयोग स्थापित कर चुका है और विभिन्न स्तरों पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम चला रहा है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के ट्री+सीआई फ्रेमवर्क (प्रशिक्षण, अनुसंधान, शिक्षा, विस्तार, परामर्श और नवाचार) का उल्लेख करते हुए कहा कि यही इसकी शैक्षणिक और पेशेवर गतिविधियों का आधार है।
प्रो. वांद्रा ने बताया कि आरआरयू देशभर में 11 विशेष स्कूलों और आठ परिसरों के माध्यम से डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी सहित 60 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करता है। इन कार्यक्रमों को आधुनिक पुलिसिंग की बहुआयामी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिनमें अकादमिक अध्ययन के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि यह सहयोग स्मार्ट पुलिसिंग (सख्त, आधुनिक, जवाबदेह, संवेदनशील और तकनीक-सक्षम पुलिसिंग) की अवधारणा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ 'मिशन कर्मयोगी' और 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय विजन को भी मजबूती देगा।
समझौते के तहत आरआरयू और पश्चिम बंगाल पुलिस संयुक्त रूप से पुलिस की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करेंगे और उनका संचालन करेंगे। इसके तहत नए आपराधिक कानूनों को पुलिसिंग में प्रभावी ढंग से लागू करने, विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेषज्ञता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आतंकवाद निरोधक रणनीति, साइबर अपराध और साइबर खतरों से निपटना, आपदा प्रबंधन, जांच प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे विषय शामिल होंगे।
इसके अलावा दोनों संस्थान ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं और नीतिगत अध्ययनों को भी बढ़ावा देंगे, जिससे साक्ष्य-आधारित पुलिसिंग और कानून प्रवर्तन की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य पुलिस बल की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, निरंतर पेशेवर विकास को बढ़ावा देना और भविष्य की जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी को और बेहतर बनाना है।
--आईएएनएस
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