आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से मांगा जवाब, स्वास्थ्य रिपोर्ट की जांच के दिए निर्देश

आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से मांगा जवाब, स्वास्थ्य रिपोर्ट की जांच के दिए निर्देश

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू की स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को राजस्थान सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट की जांच कर बताए कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति अंतरिम जमानत देने योग्य है या नहीं।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ आसाराम की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने 2013 के नाबालिग दुष्कर्म मामले में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने वाले फैसले को चुनौती दी है। इसके साथ ही उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की भी मांग की है।

राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम फिलहाल स्वस्थ हैं और करीब तीन महीने पहले वे अयोध्या तथा काशी विश्वनाथ मंदिर गए थे, जहां उन्होंने पैदल भ्रमण भी किया था।

उन्होंने कहा कि आसाराम को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन तंत्र) संबंधी समस्या के कारण रक्तस्राव की शिकायत है, जो फिलहाल अस्थायी प्रतीत होती है और उनका इलाज चल रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संबंधित अधिकारियों से ताजा निर्देश लेकर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेगी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यदि उनकी हालत इतनी गंभीर नहीं है तो बात अलग है, लेकिन यदि स्थिति गंभीर हुई तो हम नहीं चाहते कि बाद में किसी पर आरोप लगे।"

वहीं, आसाराम की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर है और उन्हें अभी भी उच्च जोखिम बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पहले राज्य सरकार की मेडिकल रिपोर्ट पर आधारित राय का इंतजार करेगा। यदि स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में गंभीर पाई जाती है, तो केवल इलाज के उद्देश्य से सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।

अदालत ने राजस्थान सरकार को 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई भी उसी दिन तय की है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया था। यह याचिका राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ के 27 मई के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें 2013 के नाबालिग दुष्कर्म मामले में उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। हालांकि उस समय शीर्ष अदालत ने अंतरिम मेडिकल बेल देने से इनकार करते हुए कहा था कि पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा।

आसाराम को वर्ष 2018 में जोधपुर स्थित विशेष पॉक्सो अदालत ने अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा है। इसके अलावा, आसाराम गुजरात में अपनी एक महिला शिष्या के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अंतरिम मेडिकल जमानत पर बाहर चल रहे आसाराम ने 28 मई को जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया था।

--आईएएनएस

डीएससी