नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। छात्रा व एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत की बेंच को बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की जाएगी।
दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की एनएसए के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था और 5 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह मुआवजा उनकी हिरासत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाए। इसमें गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम और अन्य अधिकारी शामिल हैं।
हाईकोर्ट ने नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन में कथित भूमिका को लेकर आकृति चौधरी पर एनएसए लगाए जाने के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। अदालत ने हिरासत के आधार को सिर्फ अनुमान पर आधारित और पर्याप्त सामग्री के अभाव वाला पाया था।
हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई को "उपहास के योग्य" बताते हुए संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में अदालत की नाराजगी दर्ज करने का भी निर्देश दिया था। अब राज्य सरकार इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है।
आकृति चौधरी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलतराम कॉलेज से हिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद वह डीयू से ही कानून की पढ़ाई कर रही हैं। आकृति चौधरी मूल रूप से पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली हैं।
वह अपने कॉलेज के दिनों से ही छात्र एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने लगीं। कुछ महीने पहले जब नोएडा में 40 हजार से ज्यादा मजदूर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे, तो उस प्रदर्शन में आकृति चौधरी का नाम सामने आया था। इसी मामले में उन पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी, जिसे अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है।
--आईएएनएस
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