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24 अगस्त का पंचांग: सावन के चौथे व आखिरी व्रत से भोलेनाथ को करें प्रसन्न, दोपहर 12:04 से 12:54 बजे तक अभिजित मुहूर्त

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नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

24 अगस्त 2026 को श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि, तड़के 4:19 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6:21 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन सावन महीने का आखिरी और चौथा सोमवार है। जो कोई भी अभी तक सावन के सोमवार का व्रत नहीं रख पाए हैं, वे आखिरी व्रत कर सकते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को श्रद्धापूर्वक की गई पूजा का विशेष फल मिलता है। भगवान भोलेनाथ व मां पार्वती अति प्रसन्न होते हैं।

सोमवार सुबह 6:10 बजे सूर्योदय और शाम 6:48 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, दोपहर बाद 4:27 बजे चंद्रोदय और अगले दिन तड़के 3:16 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा रात लगभग 08:28 बजे तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

सोमवार को हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि सुबह लगभग 07:03 बजे तक प्रीति योग है। इसके बाद आयुष्मान योग प्रभावी हो जाएगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:54 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल दोपहर 3:06 से 4:53 बजे तक रहेगा।

वहीं, राहुकाल सुबह 7:45 बजे से 9:19 बजे और गुलिक काल दोपहर 2:04 से शाम 3:38 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल सुबह 10:54 से 12:29 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।

सोमवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में स्थित रहेगा। पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

--आईएएनएस

एसडी/एएस