कोलकाता, 14 जुलाई (आईएएनएस)। टीएमसी की 21 जुलाई को कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित विक्टोरिया हाउस के सामने होने वाली 'शहीद दिवस' रैली विवादों में घिर गई है। पुलिस ने ममता बनर्जी वाले गुट को कानून-व्यवस्था और धारा 163 का हवाला देकर अनुमति नहीं दी। पार्टी ने हाईकोर्ट का रुख किया है, जबकि बागी गुट को वैकल्पिक स्थान मिला है। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने इसको लेकर बड़ा बयान दिया है।
तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली को लेकर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "21 जुलाई टीएमसी का कोई प्रोग्राम नहीं है। यह बंगाल के राजनीतिक इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना है। यह एक काला दिन है। राजनीतिक कार्यकर्ता मारे गए और राजनीतिक प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं। हम सभी उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।"
कोर्ट के टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को अपना वॉयस सैंपल जमा करने के आदेश पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "उन्हें इस शर्त पर जमानत दी गई थी कि वह कोर्ट के साथ सहयोग करेंगे। लेकिन वह सहयोग नहीं कर रहे हैं। अब कोर्ट कार्रवाई कर रहा है। यह कोर्ट के सामने का मामला है, और कोर्ट ही इसका फैसला करेगा।"
ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "डायमंड हार्बर में बहुत सारे गलत काम हुए हैं। सबसे बड़ी गड़बड़ी सेवाआश्रय के नाम पर की गई। लोगों को धोखा दिया गया, और कई लोगों को इसकी वजह से नुकसान हुआ। पहले लोग बोलने से डरते थे, लेकिन अब वे आगे आकर शिकायत कर रहे हैं। मामले की जांच होनी चाहिए।"
वहीं, 16 अगस्त को मनाए जाने वाले 'खेला होबे दिवस' की जगह 'आयुष्मान दिवस' मनाने के सरकार के फैसले पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "उन्होंने 'खेला होबे दिवस' मनाया और इसके नाम पर अलग-अलग जगहों पर मार्च निकाले, जिससे हिंसा और गुंडागर्दी हुई। उन्हें ऐसा करने की इजाजत किसने दी? आयुष आम लोगों के इलाज और भलाई के लिए है। उन्होंने आयुष्मान योजना और आयुष डिपार्टमेंट के काम को रोक दिया था। हम इसे लागू करेंगे ताकि लोगों को इन सुविधाओं का फायदा मिल सके।"